महावीर भगवान, हमें  अभिमान की पुण्य निधान हैं

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डॉ. साध्वी परमयशाजी

महावीर भगवान, हमें अभिमान की पुण्य निधान हैं

महावीर भगवान, हमें अभिमान कि पुण्य निधान है।
उतरा देव विमान कि जय जय गान है।
मां त्रिशाला के लाल दुलारे, सिद्धार्थ कुल ताज है।
वंदनवारे सजी घर घर दिल में सात्विक नाज है।
इन्द्र करे अभिषेक, शक्ति आलेख, सुमेरू शान है।
केसर बरसी जन्मा वर्धमान है।
वीर प्रभु की हम मनाएं जन्म जयंती ये पावन।
हम सब के सौभाग्य सुहाने करें प्रभु का अभिनंदन।
करें समर्पण प्राण, पाये वरदान, यही अरमान है।
महावीर वाणी मंजिल आह्वान है।
रोहिणेय की किस्मत जागी अर्जुनमाली महाभागी।
चंडकौशिया बना विरागी हरिकेशी है सौभागी।
गौतम अमृत धार, चंदना पार, गजब अभियान है।
श्रद्धा सबूत सेठ सुदर्शन शान है।।
बीस-बीस मारणांतिक संगम कष्टों को सह निखरे।
शूलपाणि के उपसर्गों में अमृतमय वाणी प्रसरे।
सहे रस्सी प्रहार, खीर साकार पैर चूल्हा मुसकान है
कानों में कीले समता संगान है।।
आनंद कामदेव शंख पोखली श्रावक बड़े विलक्षण हैं।
सुलसा जयंती श्राविकाएं आस्था के आलंबन हैं।
चौदह हजार है संत, सिद्ध भगवंत निराला विधान है।
साध्वियां छत्तीस हजार महान है।
लय- भारत म्हारों देश