साध्वी समुदाय का दस दिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर

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साध्वी विशालयशा 

साध्वी समुदाय का दस दिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर

जैन धर्म ध्यान की परंपरा बहुत प्रचलन काल से चली आ रही है। किंतु तेरापंथ धर्मसंघ में इसे क्रियान्वित करने तथा युगानुरूप प्रस्तुत करने का श्रेय युग प्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी को बनता है। आपने आचार्यश्री तुलसी की दृष्टि प्राप्त होने पर अपने प्रज्ञा बल के आधार पर इसे प्रेक्षाध्यान के रूप में पुर्नजीवित किया। प्रेक्षाध्यान की गूंज आज देश विदेश सर्वत्र फैल रही है। लाखों लोगों ने इससे लाभ उठाया है और अपनी जीवन शैली को स्वस्थ व सुन्दर बनाने का प्रयास किया है और कर रहे हैं।
वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण जी के निर्देशन में इस पद्धति को एडवांस टेक्नोलोजी के माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है पूज्यवर ने सन् 2026-2027 के वर्ष को योगक्षेम वर्ष के रूप में घोषित किया है। साधु-साध्वियां व श्रावक-श्राविका समाज में ज्ञान ध्यान की चेतना का विकास हो ओर जीवन में केसे आध्यात्मिक संस्कारों वृद्धिगत हो इसके प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग कालांशों का आयोजन किया गया है। योगक्षेम वर्ष के सत्र का प्रारंभ मुख्यत: दो कालांशों के साथ हुआ।
1 तत्वज्ञान प्रशिक्षण
2 प्रेक्षाध्यान प्रशिक्षण
प्रेक्षाध्यान प्रशिक्षण के अन्तर्गत 1 मार्च-10 मार्च 2026 तक साध्वी समुदाय के लिए प्रेक्षाध्यान का दस दिवसीय आवासीय शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का आयोजन तुलसी अन्तर्राष्ट्रींय केन्द्र में रखा गया। शिविर में संभागी साध्वियों की संख्या लगभग 74 तथा समणीजी 5 थे। शिविर का शुभारंभ 1 मार्च को मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के पश्चात पूज्यवर के मुखारविन्द से हुआ। इस दौरान पूज्यप्रवर ने प्रेक्षाध्यान की उपसंपक्ष के सूत्र सबको स्वीकार करवाए।
हांलाकि प्रेक्षाध्यान प्रशिक्षण का सम्पूर्ण जिम्मा साध्वी प्रमुखाश्री विश्रुतविभाजी का है किन्तु उन्होंने अपने कन्डीसन के रूप में साध्वी शुभ्रयशाजी को नियोजित किया तथा उनके सहयोगी के रूप में साध्वी शशिप्रभा जी, साध्वी आरोग्यप्रभा जी, साध्वी आस्थाप्रभाजी, साध्वी विशालयशाजी, साध्वी पुण्यप्रभाजी, साध्वी समताप्रभाजी, साध्वी मेघप्रभाजी और साध्वी वैराग्यप्रभाजी को योजित किया गया। इस शिविर का उद्देश्य था प्रेक्षाध्यान क्या? प्रेक्षाध्यान क्यों? प्रेक्षाध्यान कैसे? इस त्रिपदी के अनुसार यह शिविर काफी सफल रहा। इसमें संभागी बनने वाले शिविरार्थियों को भी एक सीमा तक संतुष्टि हुई।
शिविर की दिनचर्या प्रातः लगभग 5.00 से प्रारंभ हो जाती और रात्रि लगभग 9.30 तक चलती। साध्वियों को प्रेक्षाध्यान कायोत्सर्ग अनुप्रेक्षा व मंत्रजप आदि प्रयोग करवाए गए। सभी साध्वियों ने उत्साह के साथ प्रेक्षाध्यान को आत्मसात करने का प्रयास किया। इस शिविर का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षण का केन्द्र था। सायं 5.15 से 5.45 तक पूजयप्रवर की सन्निधि में ध्यान के प्रयोग करना। इन प्रयोगों से सभी साध्वियों ने अपने आपको एनर्जेटिक महसूस किया। प्रयोगो के साथ साथ पूज्यप्रवर कभी-कभी प्रेरणा पाथेय भी फरमाते। जैसे कायिक स्थिरता ls the foundation of preksha meditation काय स्थिरता से वाक संयम और मन का संयम स्वत: हो जाता है।
शिविर काल में साध्वी प्रमुखाश्री जी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने प्रेरणा देते हुए फरमाया गृहस्थावस्था में B.A, MA, CA आदि की पढ़ाई करते हैं किन्तु अध्यातम के श्रेत्र में B.A, MA, CA करें तो हमारा जीवन भी सुखी व शांत बन सकता है। पूज्यप्रवर के निर्देशों का जागरूकता से पालन कर सकते है।
BA - Body Awarness
MA - Mentle Awarness
CA - Conscious Awarness
साध्वी वर्याजी ने भी अपने उद्बोधन में फरमाया यह शिविर केवल दस दिन का ही न रहे यह शिविर जिन्दगीभर चलता रहे। इस शिविर में शिविरार्थि यों के iq, eq, sq test के लिए चार वर्ग (आर्जव मार्दव,लाघव व संयम) बनाए गए। सभी संभागी ने जोश व उत्साह के साथ भाग लिया। शिविर में अपनी संभागिता के लिए आत्मतोष का अनुभव किया। अपने अनुभवों को गीत के माध्यम से प्रवचन कार्यक्रम के बाद अभिव्यक्ति भी दी। इस शिविर में मीना बहन, भारती बहन, मुमुक्षु शांता जैन, विजयश्री बाई और सज्जन बाई का भी सहकार रहा।