अणुव्रत देता है चन्द्रमा जैसी शीतलता

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तेरापंथ भवन, कामरेज

अणुव्रत देता है चन्द्रमा जैसी शीतलता

आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या डॉ साध्वी परमयशाजी के सान्निध्य में 78 वां अणुव्रत स्थापना दिवस के कार्यक्रम का समायोजन हुआ। डॉ. साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज विश्व मैत्री के लिए अणुबम नही अणुव्रत चाहिए। वह इंसान बड़ा नहीं जो करोड़ो रूपए कमाता है बल्कि वह इंसान बड़ा है जो करोड़ो का दिल जीतता है। करोड़ो दिलों पर राज करने मानवता के मसीहा थे आचार्य श्री तुलसी। जिन्होंने देश और दुनिया को नैतिक आंदोलन दिया अणुव्रत। अणुव्रत आंदोलन एक असाम्प्रदायिक अभियान है। जाति वर्ण रंग लिंग से युक्त मानवीय मूल्यों की सौरभ है। अणुव्रत समन्दर का वो मोती है जिससे अच्छे इंसान की पहचान होती है। अणुव्रत वह अमृत वाणी है जिसके हर अलफाज में जान होती है।
अणुव्रत क्या है? अणुव्रत है चन्द्रमा जैसी शीतलता, हिमालय जैसी सोच सूर्य जैसी तेजस्विता देता है, सागर जैसी गंभीरता देता है,धरती जैसा धैर्य और गंभीरता देता है आकाश जैसे व्यापक विशाल है झरने जैसी निर्मलता गतिशीलता उपयोगिता देता है। डॉ. साध्वी परमयशाजी, विनम्रयशाजी, मुक्ताप्रभाजी और कुमुदप्रभाजी ने अणुव्रत स्थापना का दिन ज्योतिर्मय बनाता है गीत का संगान किया।अणुव्रत समिति की संगठन मंत्री पायल चौरडिया ने उपस्थित जनसभा में अणुव्रत आचार संहिता का वाचन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाटक के माध्यम से प्रस्तुति दी। कामरेज की महिला मंडल ने अणुव्रत दिवस पर बर्बादी को दूर हटाएं अणुव्रत का संगान रे गीत का संगान किया। साध्वी विनम्रयशाजी ने अपने भावों की मुक्तक के माध्यम से प्रस्तुत की। कार्यक्रम का आभार ज्ञापन बाबूलाल नोलखा ने किया।