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तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन में तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, बाली-बेलुड़ द्वारा बिका बैंक्वेट में आयोजित किया गया। कार्यशाला में प्रशिक्षक उपासक सुशील बाफणा थे। मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा - भारतीय संस्कृति में संत, संन्यासी, परिव्राजकों का बहुत बड़ा महत्व है। संत के सम्पर्क से संसार घटता है और संसारी के सम्पर्क से संसार बढ़ता है। इसीलिए साधुओं का परिचय करना चाहिए। संतों का उद्देश्य आत्मकल्याण के साथ साथ समाज सुधार का भी उद्देश्य होता है। संत आपको जगाने के लिए है। जीव अनंतकाल से मोहनिद्रा में सोया हुआ है।
संत कहते है अब जाग जाओ। संत कहते है कोई भी कार्य विवेक चेतना से जागरूकता के साथ करना चाहिए। संत कहते है तत्वज्ञान का विकास करो ।तत्वज्ञान से व्यक्ति असंयम की प्रवृत्ति से बच सकता है । मुनि ने आगे में तेरापंथ मेरापंथ कार्यशाला के बारे में उद्घाटन के समय कहा - तेरापंथ की पृष्ठभूमि त्रिपदी पर अवस्थित है। आचार क्रांति, विचार क्रांति और अनुशासन क्रांति। आचार्य भिक्षु को राजनगर के श्रावकों से आचार की प्रेरणा मिली। अध्ययन और मनन से विचार की प्रेरणा मिली। तत्कालीन साधु समाज की स्थिति को देखकर उनसे अनुशासन की प्रेरणा मिली।
आचार्य भिक्षु महान साधक थे। तपे हुए व्यक्ति थे। दृढ़ मनोबली थे। आचार्य भिक्षु ने धर्म की मौलिक स्थापनाएं बताई। दान, दया, मिथ्यात्वी की सत्करनी, साध्य साधन शुद्धि आदि के बारे में सटीक व्याख्या देकर समाज पर बड़ा उपकार किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि कुणाल कुमार जी के सुमधुर संगान से हुआ। स्वागत भाषण भी जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, बाली-बेलुड़ के अध्यक्ष विवेक दुगड़ ने दिया। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद जी ने किया।