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अखंड व्यक्तित्व के मालिक बनने का प्रयोग है लेश्या धन
आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या डॉ. साध्वी परमयशा जी के सान्निध्य में होली-रंगों का त्यौहार के कार्यक्रम का समायोजन हुआ। डॉ साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत पर्वों का देश है। हर तिथि तारीख को ताजगी तरक्की देते कोई न कोई उत्सव आता है। दीवाली प्रकाश का पर्व है। होली रंगों का पर्व है। रंगों से हमारा व्यक्तित्व प्रभावित होता है। अखंड व्यक्तित्व के मालिक बनने का प्रयोग है लेश्या ध्यान। लेश्या रंगों का ध्यान है लेश्या ध्यान करने वाला प्रतिदिन होली का जश्न मनाता है। मेडीटेसन में दीप एण्ड लांग ब्रीथिंग का अभ्यास करते हैं। तब रंगों का बैलेंस हमारे मन मस्तिष्क में रहता है।
आपने कहा कि ज्ञान की होली की गोशालक ने जिसने सम्यक ज्ञान को ताक पर रख दिया। दर्शन की होली जमाली ने की। जिसने सम्यक दर्शन को दरकिनार कर दिया। चरित्र की होली कुंडरीक ने की। जिसने चारित्र रत्न को खो दिया। तप की होली की संभूत मुनि ने जिसने त्याग तप का निदान किया। आपने आगे कहा कि अगर क्रोध को शांत करना है तो णमो अरहंताणं का ज्योति केन्द्र पर सफेद रंग के साथ ध्यान करें। अगर आपको नींद नहीं आती तो णमो सिद्धाणं का दर्शन केन्द्र पर लाल रंग के साथ ध्यान करें। अगर आपको मेमोरी पावर को बढाना है तो णमो आयरियाणं का ज्ञान केन्द्र पर पीले रंग के साथ ध्यान करें। अगर आप स्वस्थ रहना चाहते तो णमों उवज्जायाणं का आनंद केन्द्र पर हरे रंग के साथ ध्यान करे।
अगर आपको रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति को बढ़ाना चाहते हैं तो णमों लोएसव्वसाहुणं का तेजस केन्द्र पर नीले रंगों के साथ ध्यान करें। होली का उत्सव ज्ञान सम्पन्न,आनंद सम्पन्न, विवेक सम्पन्न, प्राणशक्ति सम्पन्न बनाएं। साध्वी मुक्ताप्रभा जी ने सबको लेश्या ध्यान करवाया और स्वरचित कविता के भाव प्रस्तुत किए। साध्वी कुमुदप्रभाजी ने होली क्या कहता है ? इसके बारे में विस्तार से बताया। कामरेज तेरापंथ महिला मंडल ने ‘होली चौमासा आया मन का उपवन हरसाएं’ गीत का संगान किया। डॉ. साध्वी परमयशा जी, साध्वी विनम्रयशाजी, मुक्ताप्रभाजी और कुमुदप्रभाजी ने ‘होली आयी रे खुशियां री झोली भर-भर लाई रे’ गीत का अपनी मधुरिम स्वर लहरियों के साथ संगान किया। कामरेज सभाध्यक्ष शंकरलाल मेहता ने सभी का आभार ज्ञापन किया।