जहां समर्पण है- वहां विकास है

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उत्तर कोलकाता।

जहां समर्पण है- वहां विकास है

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमारजी के सान्निध्य में तथा तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में विनायक एन्क्लेव में 'कैसे करे योगक्षेम' कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें 35 बहिनें थी। इस अवसर पर मुनि जिनेश कुमारजी ने कहा मैं कुछ होना चाहती हूँ । अनंत अनंत प्राणियों में एक मनुष्य भी है वह विकास चाहता है, कुछ बनना चाहता है । विकास के लिए व्यक्ति को अहंकार विलय की साधना करनी चाहिए। जहां समर्पण है वहां विकास है। जहां अहंकार वहां विनाश है। अर्हत ‌भगवान पूर्ण होते हैं।
हम अपूर्ण है हमें पूर्णता की विकास करना। विकास के लिए निस्पृहता चाहिए। भौतिक चाह नहीं आध्यात्मिक होनी चाहिए। केवल कर्म क्षय की भावना होनी चाहिए। पद आकांक्षा विकास के बाधक तत्व हैं। व्यक्ति को सरल होना चाहिए। जो सीधा होता है वही सिद्ध होता है । भला, भोला चालाक तीन प्रकार के व्यक्ति होते हैं । जो भला होता है उसका विकास होता है। हर पास्थिति में व्यक्ति को संतुलित रहना चाहिए। मन को शांत रखना दूसरों के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। जो प्राप्त है उसकी सुरक्षा करनी चाहिए ,जो अप्राप्त है उसको प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए। अनुप्रेक्षा जप, ध्यान स्वाध्‌याय, आत्म निरीक्षण के माध्यम से व्यक्ति विकास के शिखर तक पहुंच सकता है। मुनि परमानंदजी ने कहा व्यक्ति उन्नति चाहता है ,उन्नति के लिए मन को शांत रखना चाहिए। उपासिका सुनीता डोसी, प्रेक्षा प्रशिक्षक श्वेता भंसाली ने विचार रखे। स्वागत भाषण तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा सपना बरमेचा ने किया। आभार मंत्री सुनीता बैद ने किया। मर्यादा आधारित प्रश्न मंच का कार्यक्रम हुआ।