देशभर में शाखा मंडलों के माध्यम से ‘गृहलक्ष्मी स्वाभिमान अभियान’ का भव्य आयोजन

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं।

देशभर में शाखा मंडलों के माध्यम से ‘गृहलक्ष्मी स्वाभिमान अभियान’ का भव्य आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा देशभर में अपनी शाखा मंडलों के माध्यम से ‘गृहलक्ष्मी स्वाभिमान अभियान’ का आयोजन किया गया। इस अभियान के अंतर्गत गृहलक्ष्मी के कार्यों का समुचित आकलन करने तथा उनके सम्मान और गरिमा के प्रति समाज को संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से शाखा मंडलों द्वारा विभिन्न एनजीओ को आमंत्रित किया गया। इस संवाद से अत्यंत प्रेरणादायी निष्कर्ष प्राप्त हुए और गृहलक्ष्मी को पारिवारिक, सामाजिक तथा राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान एवं सम्मान दिलाने के लिए सकारात्मक चिंतन-मंथन हुआ। देशभर की कुल 194 शाखा मंडलों द्वारा 1504 एनजीओ को आमंत्रित किया गया। माता द्वारा अपने कलेजे के टुकड़े को अध्यात्म की राह पर अग्रसर होने के लिए धर्मसंघ को समर्पित कर देना अत्यंत विरल और प्रेरणादायी समर्पण का उदाहरण है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए तेरापंथ धर्मसंघ में दीक्षित चारित्रात्माओं की माता/दादी/नानी को ‘प्रेरणा सम्मान’ प्रदान किया गया। देशभर में कुल 329 माताओं को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम की रिपोर्ट देशभर के 264 समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई। 
लाडनूं में आचार्य श्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य में 13 मार्च को आयोजित प्रेरणा सम्मान समारोह में कुल 37 माताओं को सम्मानित किया गया। आचार्य श्री महाश्रमणजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि जैसे साधु-साध्वी तीर्थ हैं, वैसे ही श्रावक-श्राविका भी तीर्थ स्वरूप हैं। साधु-संत जहाँ बड़े रत्नों की माला के समान हैं, वहीं श्रावक-श्राविका छोटे रत्नों की माला के समान हैं। उन्होंने कहा कि भगवान ऋषभदेव को जन्म देने वाली माता विलक्षण थीं, उसी प्रकार चारित्रात्माओं को जन्म देने वाली माताएं भी अपना विशिष्ट अस्तित्व रखती हैं। अपने बच्चों को धर्मपथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देना, उन्हें दीक्षा के लिए तैयार करना तथा यदि कोई स्वयं संयम मार्ग की ओर बढ़ना चाहे तो उसका सहयोग करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा नानी-दादी के सम्मान के इस उपक्रम को अत्यंत सराहनीय बताया। साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी ने अपने वक्तव्य में कहा कि अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल ने माताओं द्वारा संयम मार्ग के लिए किए गए त्याग और योगदान का सम्मान करते हुए उन्हें सम्मानित करने की एक सुदृढ़ परंपरा प्रारंभ की है। उन्होंने कहा कि महिला मंडल गुरुदेव के निर्देशानुसार अंकुरम, हमसफर, सखी समिट आदि विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता और प्रशिक्षण का कार्य कर रहा है। ये सभी कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से भी संचालित किए जाते हैं और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे कार्य भी अत्यंत सराहनीय हैं। महिला मंडल आचार्य प्रवर के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। 
कार्यक्रम का शुभारंभ लाडनूं महिला मंडल की उपाध्यक्ष शोभा दूगड़ के स्वागत वक्तव्य से हुआ। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष सुमन नाहटा ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संयोजन संगठन मंत्री निधि सेखानी ने किया तथा सम्मान पत्र का वाचन उपाध्यक्ष नीतू पटावरी ने किया।  कार्यक्रम में सुजानगढ़, सरदारशहर, बीदासर, छापर, छोटी खाटू एवं लाडनूं महिला मंडल के सदस्यों की पूर्ण सहभागिता रही। लाडनूं महिला मंडल की मंत्री लीना दुगड़ भी पूरी टीम के साथ उपस्थित रहे।