आचार्य महाप्रज्ञ एक कालजयी दार्शनिक संत, जिनका ज्ञान और ध्यान विश्व के लिए वरदान : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 13 अप्रैल, 2026

आचार्य महाप्रज्ञ एक कालजयी दार्शनिक संत, जिनका ज्ञान और ध्यान विश्व के लिए वरदान : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी ने धर्मसंघ के दसवें आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के 16वें महाप्रयाण दिवस पर उन्हें भावांजलि अर्पित की। जैन विश्व भारती के सुधर्मा सभा में आयोजित विशेष धर्मसभा में आचार्यश्री ने महाप्रज्ञजी के कालजयी व्यक्तित्व, आगम संपादन और प्रेक्षाध्यान के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक अवदानों को रेखांकित किया।
ज्ञान और प्रज्ञा का संगम था 'महाप्रज्ञ' व्यक्तित्व : आचार्यश्री ने फरमाया कि बैसाख कृष्णा एकादशी का दिन इतिहास में 'महाप्रज्ञ' महाप्रयाण दिवस के रूप में दर्ज है। पूज्य प्रवर ने फरमाया कि विक्रम संवत 2035 के गंगाशहर चातुर्मास में आचार्य तुलसी ने मुनिश्री नथमलजी (टमकोर) की विलक्षण मेधा को देखते हुए उन्हें 'महाप्रज्ञ' अलंकरण प्रदान किया था। नब्बे वर्षों का यशस्वी जीवन जीने वाले आचार्य श्री महाप्रज्ञ तेरापंथ के दस आचार्यों में सर्वाधिक आयुष्य प्राप्त करने वाले आचार्य थे।
आगम संपादन और प्रेक्षाध्यान के प्रणेता : आचार्यश्री ने फरमाया कि महाप्रज्ञजी का नाम विश्व पटल पर एक 'दार्शनिक संत' के रूप में विख्यात हुआ। उन्होंने गुरुदेव तुलसी के साथ मिलकर आगम संपादन के कार्य में अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया। प्रेक्षाध्यान जैसी वैज्ञानिक पद्धति उनकी वह अनमोल देन है, जो आज विदेशों तक मानवता को शांति प्रदान कर रही है। आचार्यश्री ने स्वयं रचित गीत के माध्यम से अपने आराध्य गुरुदेव के प्रति गहन श्रद्धा निवेदित की।
आचार्य तुलसी के साथ ‘तुलसी-महाप्रज्ञ’ की बेमिसाल जोड़ी : आचार्य प्रवर ने गुरु-शिष्य के अद्वितीय संबंध की चर्चा करते हुए फरमाया कि महाप्रज्ञजी ने मुनि, युवाचार्य और आचार्य के रूप में गुरुदेव तुलसी के साथ एक लंबा सफर तय किया। यह भारतीय अध्यात्म की एक दुर्लभ घटना थी जब आचार्य तुलसी ने अपनी ही विद्यमानता में महाप्रज्ञजी का पट्टाभिषेक कर उन्हें शासन की बागडोर सौंपी थी।
मनिंदरजीत सिंह बिट्टा और अभातेयुप की उपस्थिति : इस अवसर पर अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने आचार्य महाश्रमणजी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपनी श्रद्धासिक्त अभिव्यक्ति दी। साथ ही, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (ABTYP) द्वारा आयोजित 'उत्तरांचल सम्मेलन' का मंचीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन मांडोत ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी और युवाओं ने सामूहिक गीत की प्रस्तुति दी।
साध्वी प्रमुखा श्री ने दी विनयांजलि : साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी ने महाप्रज्ञजी को नमन करते हुए कहा कि वे ध्यान की ऐसी गहराइयों में उतर जाते थे जहाँ घाती कर्मों का क्षयोपशम संभव होता था। साध्वीवृंद ने सामूहिक गीत के माध्यम से अपनी भावांजलि अर्पित की।