सत्य की खोज के लिए मस्तिष्क के द्वार खुले रखना जरूरी : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 14 अप्रैल, 2026

सत्य की खोज के लिए मस्तिष्क के द्वार खुले रखना जरूरी : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण जी ने उत्तरज्झयणाणि आगम के माध्यम से अमृत देशना प्रदान की। 'सत्य की खोज और मैत्री' विषय पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने फरमाया कि सच्चाई को जानने के लिए साधना का योग होना अनिवार्य है।
1. सत्य की प्राप्ति और साक्षात्कार के सूत्र : अनाग्रह और खुला मस्तिष्क: आचार्य श्री ने फरमाया कि सच्चाई की खोज के लिए 'अनाग्रह' (बिना किसी पूर्व धारणा के) होना आवश्यक है। जो व्यक्ति पूर्वाग्रह से ग्रस्त होता है, उसके लिए सत्य के द्वार बंद हो जाते हैं। सत्य के साक्षात्कार हेतु मस्तिष्क के द्वारों को खुला रखना अनिवार्य है। तटस्थ समीक्षा: ज्ञान की चर्चा और शोध के समय तार्किकता एवं समीक्षात्मक बुद्धि का उपयोग करना चाहिए। यदि वक्ता की कोई बात संगत न लगे, तो उसे गहराई से समझकर ही स्वीकार करना चाहिए।
दृढ़ता और साहस : सत्य को प्राप्त करने के बाद उसकी सुरक्षा के लिए मनोबल और साहस का होना भी अपेक्षित है। युक्ति बनाम मान्यता: आग्रही व्यक्ति अपनी मान्यता सिद्ध करने के लिए तर्क गढ़ता है, जबकि निष्पक्ष व्यक्ति वहां जाता है जहाँ 'युक्ति' (सही तर्क) होती है।
2.अहिंसा और मैत्री: 'जीओ और जीने दो' मैत्री का अर्थ : पूज्य प्रवर ने फरमाया कि स्वयं सत्य की खोज करें और सभी प्राणियों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखें।
जीओ और जीने दो : जीने दो : किसी के जीने में बाधा न डालें और किसी भी जीव को कष्ट न पहुँचाएँ। जीओ : संयमपूर्वक जीवन जीना, जिसमें अहिंसा और सत्य जैसे व्रतों का पालन हो।
न्यूनतम सीमा : मैत्री की न्यूनतम सीमा यह है कि हम किसी भी जीव को मारें नहीं और न ही उसे तकलीफ देने का भाव रखें।
विशेष कार्यक्रम और प्रस्तुतियाँ : अणुव्रत पर वक्तव्य : मुख्य मुनिश्री महावीर कुमारजी ने अणुव्रत की पृष्ठभूमि, इसके उद्देश्यों और विभिन्न संस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति : नेपाल की आराध्या गोलछा ने अपनी विशेष प्रस्तुति दी।
नेपाली नववर्ष मंगलकामना : परम पूज्य गुरुदेव ने नेपाली नववर्ष के पावन अवसर पर विशेष मंगलपाठ फरमाया और नेपाल से आए हुए श्रद्धालुओं को अपना पावन आशीर्वाद प्रदान किया।