तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

गुरुवाणी/ केन्द्र

अहमदाबाद पश्चिम।

तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी अणिमाश्री जी एवं प्रोफेसर डॉ साध्वी मंगल प्रज्ञाजी, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन और तेरापंथी सभा अहमदाबाद पश्चिम के तत्वावधान में आयोजित 'तेरापंथ:मेरापंथ कार्यशाला में उपस्थित विशाल परिषद् को सम्बोधित करते हुए साध्वी अणिमा श्री जी ने कहा-सम्पूर्ण तेरापंथ संघ आचार्य भिक्षु के प्रति कृतज्ञ है। वे कृतज्ञता के भाव परिवार और समाज के सदस्यों में होने चाहिए। जिन बुजुर्गों ने अस्तित्व क़ायम करने के लिए संस्कार दिए हैं,उनके प्रति कृतज्ञभाव बढ़ने चाहिए। आचार्य भिक्षु द्वारा प्रदत्त तेरापंथ को उत्तरवर्ती आचार्य परंपरा ने सुदृढ़ बनाया है,उस वंदनीय आर्य-श्रृंखला के प्रति तेरापंथ संघ सदैव कृतज्ञ रहेगा ।मंदिरों में जाने के बजाय आज जरूरत है घर को मंदिर बनाने की। ऐतिहासिक घटना प्रसंग का उल्लेख करते हुए साध्वी जी ने कहा-यह संघ हमारा है,हम इस संघ के वफादार सैनिक बनकर संघ सुरक्षा में अपने श्रम और समय का संयोजन करें ।महाविभूति गणपाल आचार्य श्री महाश्रमणजी की विकासमयी अनुशासना में हम सभी साधना करते रहें। इस अवसर पर अपने उद्गार में प्रोफेसर डॉ साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ने कहा-महामना आचार्य भिक्षु का व्यक्तित्व संयम से सुवासित था ।ऐसा प्रतीत होता है उस महान ज्योतिपुंज का अवतरण तेजस्विता लेकर हुआ। शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक समस्याओं के वे महासमाधायक थे। तेरापंथ का अर्थ है-आत्मा की साधना और चिंतन का उर्ध्वारोहण ।उनके सिद्धांत,विचार अनेकान्तिक थे,अनाग्रह चेतना के कार आचार्य भिक्षु लाखों शरणार्थियों के आधार बने,पथ दर्शक बने।
तेरापंथ को व्याख्यायित करते हुए,परिषद् को प्रेरणा प्रदान करते हुए साध्वीजी ने कहा-परिवार में श्रद्धा संक्रांत हो ऐसा प्रयास हर श्रावक श्राविकाओं को करना चाहिए। तत्वज्ञान रसिक बनकर आचार्य भिक्षु के सार्वभौम सिद्धांतों को आत्मसात कर जीवन पथ को आलोकित करें। महिला मंडल के मंगल संगान से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। स्थानीय सभा अध्यक्ष सुरेश दक ने स्वागत स्वर प्रस्तुत किया। साध्वी कर्णिकाजी, साध्वी सुदर्शना प्रभाजी,साध्वी डॉ सुधा प्रज्ञाजी,साध्वी समत्वयशाजी,साध्वी डॉ राजुल प्रभाजी,साध्वी डॉ चैतन्य प्रभाजी और साध्वी डॉ शौर्य प्रभाजी ने 'आन ,बान ,शान है यह तेरापंथ 'गीत का समूह संगान कर वातावरण को सौम्यता प्रदान की। साध्वी डॉ राजुल प्रभाजी ने कहा-तेरापंथ में विकास के लिए विस्तृत अवकाश हे,अपेक्षा है गुरु के इंगित और आज्ञा श्री का सम्मान करते हुए हमें तेरापंथ के उपकार,आचार की परम्परा को आगे ले जाना है और ब्रांड बनकर आगे बढ़ना है, गण का नाम रोशन करना है। संयोजकीय वक्तव्य में डॉ. सुधा प्रज्ञा जी ने कहा-शुद्धाचार और आध्यात्मिक मूल्यों के लिए आचार्य भिक्षु ने क्रांति की ।जरूरत है उन मूल्यों को जीवन में उतारने की।
इस गरिमामय कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में उपासक प्राध्यापक डालिमचंद नौलखा ने परिषद् को तेरापंथ दर्शन,आचार्य भिक्षु के सिद्धांत, दान-दया, साधन एवं साध्य, धर्म -अधर्म,भगवान महावीर की शास्वत वाणी का सारगर्भित विश्लेषण किया। इस कार्यक्रम में महासभा से आंचलिक प्रभारी विनोद बोरदिया (डीसा), सभा प्रभारी अरुण बैद, महासभा कार्यसमिति सदस्य एवं तेरापंथ युवक परिषद अहमदाबाद के अध्यक्ष प्रदीप बागरेचा विशेष रूप से उपस्थित रहे। तेरापंथ सभा पश्चिम,युवक परिषद पश्चिम एवँ महिला मण्डल के सुप्रयास से भाई बहनों की बहुत अच्छी उपस्थिति रही। सुश्रावक राजेंद्र बोथरा ने आभार ज्ञापन किया।