आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम

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आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम

आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी सोमयशा जी ठाणा-3 के सान्निध्य में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का 17 वाँ महाप्रयाण दिवस मनाया गया, साध्वी सोमयशाजी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा आचार्य महाप्रज्ञजी का जीवन विलक्षण था, महाप्रज्ञ दिव्यपुरुष, योगी पुरुष एवं मानवता के मसीहा थे, उनका जीवन आलोक रश्मियों से सराबोर था, आपका मन स्थिरप्रज्ञ था तो विचार चलती फिरती प्रज्ञा का शब्दकोश आपका जीवन करुणा से ओतप्रोत था साहित्य का विरल संसार, कृतज्ञता और समर्पण आपके हृदय में अनुगुम्फित था और आचार्य श्री तुलसी– महाप्रज्ञ से जीवन की कुछ समानता के बारे में बताया, डॉ. साध्वी सरलयशा जी ने आचार्य महाप्रज्ञ के अवदानों के बारे में विस्तार से अवगत करवाया, साध्वी ऋषिप्रभा जी ने महाप्रज्ञ शब्द के बारें में बताया महाप्रज्ञजी विद्वताभरे रोचक प्रसंग बतायें, आचार्य महाप्रज्ञ एक व्यक्ति थे पर उनके रूप अनेक थे कभी वे आचार्य भिक्षु के विचारों को युगीन भाषा में प्रस्तुति देते नजर आते तो कभी आचार्य तुलसी के भाव्यन्तर बनकर मुखर होते तो कभी उनका दार्शनिक रूप सामने आता तो कभी वे महान साहित्यकार के रूप में उभरते कभी जीने की कला का बोध देते तो कभी वे ग्रहयोग की प्रभावक्ता करते। तिन्डीवनम के भाई-बहनों ने बडे उत्साह के साथ भाग लिया महाप्रयाण के आयोजन के उपलक्ष में दस प्रत्याख्यान करवाया गया।