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जागरण की ज्योति थीं- शासनश्री साध्वी चन्दनबाला जी
साध्वीश्री अणिमाश्री जी और प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा जी के सान्निध्य में अहमदाबाद (पश्चिम) स्थित तेरापंथ भवन में शासनश्री साध्वी चन्दनबाला जी की स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए साध्वीश्री अणिमाश्री जी ने कहा—'शासनश्री साध्वी चन्दनबाला जी ने संयम का लंबा पर्याय जागरण के साथ पूर्ण किया।' उनका मधुर व्यवहार, सहजता और उदार चेतना प्रशंसनीय थी। संघ और गुरु शरण में गति व प्रगति करते हुए उन्होंने सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त की।
असाध्य रोग के बावजूद उनकी समभाव की साधना अनवरत चलती रही और प्रशस्त भावों के साथ अनशन यात्रा संपन्न कर वे प्रयाण कर गईं। वे जागरण की प्रज्ज्वलित ज्योति थीं। उनके साथ अपने अतीत के अनुभवों को साझा करते हुए साध्वीश्री ने कहा कि उनका जीवन अनेक गुणों का समवाय था। जिस श्रद्धा और संकल्प के साथ उन्होंने धर्मसंघ में प्रवेश किया, उत्तरोत्तर अपनी कार्यक्षमता और साधना से वे विशिष्ट बन गईं। शासनश्री की सहोदरी व सहवर्तिनी साध्वी वर्धमानश्री जी, साध्वी राजश्री जी, साध्वी समीक्षाप्रभा जी, साध्वी प्रणवयशा जी और सिद्धियशा जी ने सेवा के दायित्व का सजगता से निर्वहन किया, यह उनके सौभाग्य की बात है।
प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने कहा—'जागरण के साथ जिया गया वर्तमान, प्रेरक अतीत बन जाता है।' शासनश्री साध्वी चन्दनबाला जी क्रियाशील, कर्मठ, सेवाभावी, औदार्यपूर्ण जीवन जीने वाली और वात्सल्य प्रदात्री विशिष्ट साध्वी थीं। वे अपने सद्गुणों की सुवास छोड़कर प्रस्थान कर चुकी हैं, जो सदैव हमें प्रेरणा देती रहेगी। साध्वी कर्णिकाश्री, साध्वी सुदर्शनप्रभा, साध्वी सुधाप्रभा, साध्वी सम्यकयशा, साध्वी मैत्रीप्रभा, साध्वी राजुलप्रभा और साध्वी शौर्यप्रभा ने सामूहिक संगान कर दिवंगत साध्वीश्री जी के आध्यात्मिक आरोहण की मंगलकामना की। अहमदाबाद (पश्चिम) तेरापंथ सभा के अध्यक्ष सुरेश दक, बाबूलाल सेखानी और रजनी दुगड़ ने श्रद्धा-भावना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन साध्वी सुदर्शनप्रभा जी ने किया।