करता हूँ दिल से गुणगान

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मुनि चैतन्य कुमार ‘अमन’

करता हूँ दिल से गुणगान

साध्वी चन्दनबाला जी ने किया स्वर्ग प्रस्थान,
करता हूँ दिल से गुणगान।।
गुरु तुलसी से दीक्षा पाई, पा संयम दिल में हरषाई,
महायज्ञ की कृपा सवाई, महाश्रमण गुरु के मन भाई,
साधु-सतियों का दिल जीता, ऐसी थीं वो महान।।
वर्षों तक गुरु सेवा करके, अपना आत्म खजाना भरके,
कभी नहीं रही वो डर-डरके, जीवन जीया साहस धरके।।
योगक्षेम वर्ष में जाना, अहमदाबाद में मन में ठाना,
पर क्या होगा किसने जाना, आया काल हो गई रवाना,
धरे-धराए रह गए दिल में, दिल के अरमान।।
साध्वी चन्दनबाला जी का, अजब काम का गजब तरीका,
शानदार था और सलीका, मैंने भी उनसे कुछ सीखा,
मुनि चैतन्य अमन के दिल में, है पूरा सम्मान।।