तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का भव्य आयोजन

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कोलकाता।

तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का भव्य आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा 3 के सान्निध्य में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन में तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा कोलकाता, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा मध्य-उत्तर कोलकाता के द्वारा संयुक्त रूप से ओसवाल भवन में आयोजित किया गया। कार्यशाला के मुख प्रशिक्षक उपासक अध्यापक निर्मल नौलखा थे। कार्यशाला में लगभग 122 भाई-बहिनों ने भाग लिया। इस अवसर पर उपस्थित धर्म सभा को उद्‌बोधन देते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार ने कहा जिनशासन का एक धार्मिक संगठन है-तेरापंथ । तेरापंथ तेजस्वी, यशस्वी मनस्वी शासन है। उसकी तेजस्विता का मूल आधार आचार है।
आचार्य भिक्षु इस संगठन के आधप्रवर्तक थे। वे अपने युग के विलक्षण, विचक्षण, विशिष्ठ, विवेक संपन्न व युगस्रष्टा पुरुष थे। वे जमाने के थपेड़ों से घबनाए नहीं। जब उन्हें सत्य का प्रकाश मिला, तब उन्होंने निर्भीक होकर कर उस जमाने की स्थितियों पर खुलकर सैद्धांतिक विश्लेषण किया। वे क्रांतिकारी आचार्य के रूप में पहचाने गए। उनकी धर्म क्रांति की फलश्रुति तेरापंथ है। मुनि ने आगे कही आचार्य भिक्षु अकंप आत्मबला के धनी थे। उनका साहस, धृति और परिस्थतियों से लोहा लेने का संकल्प अटूट था। वे चले प्रकृति ने उनको चेतानवी दी। वे घबराए नही। श्मशान की छत्तारयों में उन्होंने अपनी यात्रा का पहला पड़‌ाव किया। वे विशिष्ठ व्यक्तित्व के घनी थे। उनका व्यक्तित्व बेजोड्‌ था। वे अभयशील, योगसाधक तपे हुए महान पुरुष थे। उन्होंने जो मार्ग बताया उस मार्ग पर चलने से आत्मा का उत्थान होगा। तेरापंथ को समझना सत्य को समझना है । तेरापंथ मेरापंथ हो जाए यही मंगलभावना करता हूं।
मुनि कुणालकुमार जी ने गीतका संगान किया। उपासक प्रवक्ता निर्मलजी नौलखा ने कहा- तेरापंथ के दर्शन को समझना आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल, मध्य कोलकाता के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण राजेन्द्र संचेती ने दिया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, कोलकाता के अध्यक्ष अजय जी भंसाली ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यशाला के अंत में आभार ज्ञापन रूपचन्दजी श्रीमाल, ने किया। कार्यक्रम का संचालन मुनिपरमानंद जी ने किया। कार्यशाला के विभिन्न सत्र सायं लगभग 4.30 बजे तक चले। जिसमें मुनि जिनेश कुमारजी व उपासक प्राध्यापक निर्मल नौलखा ने संभागियो को प्रशिक्षण प्रदान किया। इस अवसर पर महासभा के प्रधान प्रधान न्यासी सुरेश जी गोयल आदि गणमान्य लोग विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यकर्ताओं का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।