ऋषभदेव थे धर्म और राजनीति के युगपुरुष,तप से होती है कर्मों की परम विशुद्धि : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 20 अप्रैल, 2026

ऋषभदेव थे धर्म और राजनीति के युगपुरुष,तप से होती है कर्मों की परम विशुद्धि : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य में जैन विश्व भारती के परिसर में 'अक्षय तृतीया महोत्सव' अत्यंत गरिमापूर्ण एवं भव्य तरीके से संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर लाडनूं का पूरा परिसर तप और त्याग की ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
मोक्ष मार्ग में तप का महत्व :
विशाल जनसमूह को अमृत देशना प्रदान करते हुए महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने फरमाया, 'ज्ञान से जीव भावों को जानता है, दर्शन से श्रद्धा करता है और चारित्र से निग्रह करता है, लेकिन तप वह अग्नि है जिससे आत्मा की परम विशुद्धि होती है।' आचार्यश्री ने प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का स्मरण करते हुए फरमाया कि वे केवल धर्म के ही नहीं, बल्कि राजनीति के भी महापुरुष थे। उन्होंने दीक्षा से पूर्व समाज को जीवन जीने की कला और शिक्षण-प्रशिक्षण प्रदान कर लौकिक कर्तव्यों का आदर्श निर्वहन किया।
ऐतिहासिक पारणा और संकल्प :
प्रवचन के उपरांत आचार्यश्री ने वर्षीतप करने वाले श्रावक-श्राविकाओं को संकल्प दिलाया और भगवान ऋषभदेव के नाम के मंत्रों का जाप करवाया। इसके पश्चात पारणे का भावपूर्ण दृश्य उपस्थित हुआ, जहाँ लगभग 450 से अधिक साधु-साध्वियों, समणियों और श्रावक-श्राविकाओं ने आचार्यश्री के पात्र में इक्षुरस (गन्ने का रस) दान कर अपने कठिन वर्षीतप का समापन किया। साध्वी दीक्षा की मंगल घोषणा :
महोत्सव के दौरान आचार्यश्री ने मुमुक्षु कोमल की दीक्षा की घोषणा करते हुए फरमाया कि आगामी 20 सितंबर, 2026 को 'विकास महोत्सव' के अवसर पर उन्हें साध्वी दीक्षा प्रदान की जाएगी। इस घोषणा से संपूर्ण धर्मसंघ में हर्ष की लहर दौड़ गई।
साध्वी प्रमुखाश्री व मुख्य मुनिश्री का संबोधन :
कार्यक्रम में साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभाजी ने तप को कर्मों को भस्म करने वाली ज्योति बताया।
मुख्य मुनिश्री महावीर कुमारजी ने भगवान ऋषभदेव के पारणे की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साधना में ममता का विसर्जन और समता का अर्जन ही कल्याणकारी है।
श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक प्रस्तुति :
इससे पूर्व साध्वी वर्या श्री संबुद्धयशाजी, महिला मंडल लाडनूं और स्थानीय समाज ने मधुर गीतों के माध्यम से अपनी भावाभिव्यक्ति दी।
कार्यक्रम के अंत में आचार्यश्री ने दिवंगत मंत्री मुनिश्री सुमेरमलजी 'स्वामी' (लाडनूं) के प्रयाण दिवस पर उनकी आत्मा की ऊर्ध्वगति के लिए मंगल कामना की। व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।