वैराग्य की पूर्णता  और युवा शक्ति का संकल्प

संपादकीय

सम्पादकीय

वैराग्य की पूर्णता और युवा शक्ति का संकल्प

सरदारशहर से शुरू हुई, वैराग्य की वो पावन धारा,
तुलसी-महाप्रज्ञ के आशीष से, महका शासन सारा।
भिक्षु की पावन मर्यादा, जिसकी सांसों में बस्ती है,
ग्यारहवें गुरु की छत्रछाया में, सुरक्षित संघ की हस्ती है।

सादर जय जिनेंद्र,
हमारा मन उस महान यात्रा के प्रति कृतज्ञता से भर उठा है, जिसकी शुरुआत सरदारशहर की गलियों में एक नौ वर्षीय बालक के 'मंथन' से हुई थी। मुखपृष्ठ पर अंकित वह तस्वीर केवल एक ऐतिहासिक क्षण नहीं है, बल्कि वह उस महान 'महासूर्य' के उदय की पूर्व संध्या है, जिसने आज तेरापंथ धर्मसंघ को अपनी धवल रश्मियों से आलोकित कर रखा है।
बालक मोहन का वह चिंतन, जो संसार के आकर्षण और संयम की कठिन डगर के बीच उपजा था, हमें सिखाता है कि सत्य की खोज आयु की मोहताज नहीं होती। जब उन्होंने आचार्य कालूगणी का स्मरण किया, तो उन्हें वह मार्ग मिला जिसने आगे चलकर आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ जैसे महान युग-प्रधानों के सानिध्य में एक वटवृक्ष का रूप ले लिया। आज ग्यारहवें अधिनायक के रूप में आचार्य श्री महाश्रमण जी उसी भिक्षु शासन की मर्यादा को नई ऊँचाइयाँ दे रहे हैं।
हम तेरापंथ की युवा शक्ति का आह्वान करते हैं। आचार्यश्री का दीक्षा दिवस, जिसे हम 'युवा दिवस' के रूप में मनाते हैं, हमें यह संदेश देता है कि युवा ऊर्जा जब संयम और गुरु-भक्ति से जुड़ती है, तो वह केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का उद्धार करती है। मुनि सुमेरमल जी स्वामी द्वारा प्रदत्त वह दीक्षा आज एक वैश्विक अहिंसा यात्रा का आधार बनी है।
आचार्य श्री महाश्रमण जी का दीक्षा दिवस महज एक तिथि नहीं है, यह 'युवा दिवस' के रूप में संकल्प की शक्ति का उत्सव है। इस महान यात्रा ने हमें सिखाया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो नौ वर्ष की आयु में लिया गया निर्णय भी युग-परिवर्तनकारी हो सकता है।
आज का युवा, जो अक्सर सूचनाओं के शोर में अपने पथ को लेकर भ्रमित रहता है, उसके लिए आचार्य प्रवर का जीवन एक 'प्रकाश स्तंभ' है। आचार्य श्री भिक्षु ने जिस अनुशासन और मर्यादा की नींव रखी थी, उसे आचार्य श्री अपनी अहिंसा यात्रा और धवल सेना के माध्यम से सात समंदर पार तक पहुँचा रहे हैं।
इस विशेषांक के माध्यम से हमारा उद्देश्य केवल
सूचना देना नहीं, बल्कि पाठकों और विशेषकर युवा
शक्ति के भीतर उस 'मोहन' को जगाना है जो सत्य की खोज में है। आइए, इस युवा दिवस पर हम केवल उत्सव न मनाएँ, बल्कि अपने भीतर संयम, अनुशासन और मानवता के प्रति सेवा का एक बीज बोएँ।
कार्यकारी संपादक...