जीवन नैया के कर्णधार

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प्रदीप छाजेड़

जीवन नैया के कर्णधार

परम पूज्य , अनन्त आस्था के आलय ,जन - जन के जिनालय , सरलता विनम्रता के मूर्तिमान आदर्श , दिव्य दया के देवालय , उच्च कोटि का श्रमण , वैराग्य श्री , ऐश्वर्य आदि से विभूषुत , महाप्राण व्यक्तित्व , करुणा के हिमालय , जीवन नैया के कर्णधार ,तीर्थंकर के प्रतिनिधि , युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के 53 वां दीक्षा दिवस (युवा दिवस) पर भावों से शत - शत वन्दन व इस अवसर पर मन के उदगार श्री चरणो में - आचार्य श्री महाश्रमण जी यानी विश्व के रंगमंच पर एक ऐसा विराट व्यक्तित्व है जिसके जीवन में तारतम्य ही नही साथ ही साथ जिन्हें उदय-अनुदय का अनुभव भी हैं । जिसने जीवन में सुख-दुःख को स्पर्श किया हैं । जो प्रकाश और अंधकार, सत् और असत्,मृत्यु और अमरत्व,पराक्रम और मंडता आदि सभी अवस्थाओं में से गुज़रनेवाले व्यक्तित्व है।
मानवता उत्थान के महान सन्देशवाहक भारतीय ऋषि परम्परा में आचार्य श्री भिक्षु की परम्परा के एक महान संत है - आचार्य श्री महाश्रमण जी । जिन्होंने अपनी अहिंसा की प्रलम्ब यात्रा कर वर्ण , जाति , सम्प्रदाय से मुक्त रहकर जन मानस को मैंत्री , करुणा , सेवा , सदभावना और समन्वय का सन्देश दिया । कितने राज्यों व तीन देशों में 60 हजार ( लगभग ) किलोमीटर की पदयात्रा करना इतिहास का अत्यन्त दुर्लभ दस्तावेज बन गया है ।