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तेरापंथ निहाल है: त्रिवेणी पर्व पर गुरुवर को वंदन
वैशाख मास में त्रिवेणी संगम पर, तेरापंथ निहाल है।
जनमोत्सव, दीक्षा दिवस और पट्टोत्सव, यह बेला बेमिसाल है।
अहिंसा, शांति और सद्भावना के, जो बने हैं मूर्तमान।
युगप्रधान गुरु महाश्रमण चरण में, मेरा शत-शत प्रणाम॥
बारह की अल्पायु में, लिया आपने संयम को धार ।
चौबीसी में महाप्रज्ञ जी के, बने अंतरंग आधार॥
छत्तीसी की पावन वय में, मिला युवाचार्य का मान।
वर्ष अड़तालीस में बन आचार्य, दिया संघ को नव-विहान॥
षष्ठी-पूर्ति पर साठ-हजारी यात्रा, गुरु पादम्बुज है ख़ास ।
बारह के इन सोपानों पर, गढ़ा है अनुपम इतिहास।।
अप्राप्त को जो प्राप्त कराए, वह पावन 'योग' कहाता है।
प्राप्त गुणों की रक्षा करना, 'क्षेम' रूप बन जाता है॥
चंदेरी की पावन धरा पर, 'योगक्षेम' का उत्सव भारी।
आचार्य तुलसी के पश्चात् आपने, फिर दोहराई महिमा न्यारी॥
तेरापंथ के इतिहास में आया, यह दूसरा दिव्य अवसर है।
गुरुवर के कुशल-नेतृत्व में, सुरक्षित संघ का हर घर है॥
पैदल चल-चल कर गाँव-गाँव, जगाई है नई अलख।
नशामुक्ति और नैतिकता की, दी जन-मानस को परख॥
तुलसी और महाप्रज्ञ की, परंपरा के आप हैं प्राण।
मानवता के उत्थान हित, अर्पित आपका हर एक त्राण॥
तेरापंथ टाइम्स के पन्नों से, गूँजे यह जय-जयकार।
त्रिवेणी के इस महापर्व पर, गुरुवर को वंदन बारंबार॥