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'आधी दुनिया की उजली तस्वीर'- साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभा
आर्हत वाङ्मय में सुंदर वाक्य आता है— 'सव्वं सुचिण्णं सफलं नराणां' अर्थात् मनुष्य का कोई भी (सत्) प्रयत्न विफल नहीं होता। आपने अपने गृहस्थ जीवन के छोटे आयतन में एक वैराग्य की चैतन्य ज्योति प्रज्वलित की। वही ज्योति आगे जाकर सविता बनी, फिर पुण्यवत्ता आचार्य श्री तुलसी की शुभ दृष्टि मिली। उनकी अभिनव क्रांति को सफलता में बदलने के लिए आप 6 बहनों ने पहल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
उस समय परम पूज्य गुरुदेव श्री तुलसी ने सोचा— 'वर्षों के परिश्रम के बाद आज तृषा की हार हुई है और तृप्ति की जीत'। पुण्याई का ग्राफ आगे बढ़ने लगा।
युगप्रधान आचार्य श्री तुलसी ने फरमाया— 'सफलता और खुशी हाथ-में-हाथ डाले साथ-साथ चलती हैं। जो चाहता था उसे पा लिया, यह मेरे जीवन की सफलता है; और सफलता की चाह को पूर्ण कर लिया, यह मेरी खुशी है।'
मैंने अनुभव किया है कि सफल व्यक्ति कोई महान काम नहीं करते, अपितु छोटे-छोटे कार्यों को महान ढंग से करते हैं। सफलता कोई अजूबा नहीं है, यह बुनियादी उसूलों का लगातार पालन करने का नतीजा है। सफलता मुसीबतों को पार कर हासिल की जाती है, न कि केवल ऊंचे ओहदे से। आप 6 बहनों ने सफल होने के लिए कार्यों, वृत्तियों और व्यवहारों में बदलाव लाकर रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड तोड़े हैं। सफल व्यक्ति पूरी जिंदगी चुनौतियों का मुकाबला करते हैं। उन 6 बहनों में एक नाम है— साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी का।
कहा जाता है कि ढाई अक्षर का भाग्य होता है, तीन अक्षर का नसीब होता है और साढे तीन अक्षर की किस्मत होती है; लेकिन जब उसमें चार अक्षर की 'मेहनत' जुड़ जाती है, तो जीवन के नील गगन में चार चाँद लग जाते हैं। मुझे ऐसा अनुभव होता है, आपके जीवन को गहराई से पढ़ने के बाद, कि आप सहस्त्र गुणों से सुसज्जित बनने को समुत्सुक हैं।
संवेदनशीलता, सहनशीलता, विनम्रता, उदारता, कोमलता, सहजता और श्रमशीलता आदि के समवाय का नाम है— साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा। इन महनीय गुणों से आपने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। श्रमणी संघ के आध्यात्मिक निर्माण में आप सतत जागरूकता रख रही हैं। आपमें व्यक्ति की क्षमता को उभारने, तराशने और जगाने की अद्भुत कला है। आपश्री के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में हम सबने अमित वात्सल्य और अनुग्रह प्राप्त किया है।
आपको आचार्यत्रय (आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ और आचार्य महाश्रमण) की उपासना में प्रणत रहकर बहुमूल्य गुण-रत्नों को हस्तगत करने का अलभ्य और स्वर्णिम अवसर मिला है। व्यक्तित्व को विराट बनाने वाला पाथेय मिला है। इसीलिए कहा जाता है:
हवा का सहारा मिल जाए तो नाव अपने आप चलती है,
गुरु का इशारा मिल जाए तो राह अपने आप मिलती है।
आपकी आँखों में उम्मीदों की रोशनी है, मन में संकल्पों की धार है, हाथों में कर्मठता की मशाल है और पैरों में मंजिल तक पहुँचने का विश्वास है। कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हुए आप पूज्यवर के हर सपने को साकार करें। चयन दिवस पर यही मंगल कामना है कि आप सृजन की स्याही और कर्तृत्व की कलम से धर्मसंघ में एक नया इतिहास गढ़ें।