दुर्गा के नौ रूपों से संपन्न : नवम साध्वी प्रमुखा

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साध्वी नवीन प्रभा

दुर्गा के नौ रूपों से संपन्न : नवम साध्वी प्रमुखा

नहीं जानती मैं कैसे तेरी पूजा अर्चना
नाही मेरे पास स्वर हैं, शब्द हैं और नहीं आता
मैं अल्पबुद्धि, अल्पमति और अल्पज्ञानी
फिर भी तेरी कृपा से मैंने तेरी महिमा पहचानी'
कुछ समय पहले मैं एक लेख पढ़ रही थी— 'माँ दुर्गा के नौ रूपों से मिलेंगे अमीर बनने के सबक'। फिर पढ़ा कि इनके नौ रूपों की आराधना का पर्व नवरात्रा है। जैसे-जैसे उन रूपों को पढ़ रही थी, मुझे अचानक याद आया कि ये रूप तो हमारी नवम साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा श्री जी में साक्षात् देखने को मिल रहे हैं। इनकी उपासना तो हम 365 दिन कर सकते हैं। बुलंदियों पर महान व्यक्ति ही पहुँचते हैं और वह केवल एक उड़ान से प्राप्त नहीं होती, उसके लिए वे दिन-रात एक करते हैं। आपमें आज जो मुकाम दिखाई देता है, वह एक जन्म की नहीं, कई जन्मों की साधना और भिक्षु शासन की महिमा बढ़ा रही है।
1. ब्रह्मचारिणी
कठिन परिस्थितियों में भी मन विचलित न हो और संयम बना रहे, यही सीख ब्रह्मचारिणी देवी देती हैं। यही सीख आप भी देती हैं; 'संयम' आपका मुख्य विषय है। इंद्रिय, खाद्य या वाणी संयम, हर क्षेत्र में आप अग्रणी रहती हैं। आप हमें प्रेरणा देती हैं कि— 'परिस्थितियों को दामन में समेट लो, गुमनामी से बाहर निकलकर स्वयं को पहचानो'। हमारा साधुपन कैसे सुरक्षित और तेजस्वी बने, कैसे हम आदर्श साध्वी बनें, यह गुर आप सिखाती हैं। आपका अनासक्त भाव अद्भुत है। एक बार प्रातः राश में आपको फूट में 'चीक' परोसा गया। आपने बिना कुछ बोले उसे आरोग लिया। जब साध्वी तन्मयप्रभा जी ने उसे चखा तो वह कच्चा और कसैला था। निवेदन करने पर आपने फरमाया— 'तुम लोग भी तो इसको खाते ही हो, मैंने ले लिया'।
2. चंद्रघंटा (शक्ति स्वरूपा)
सिंह पर सवार यह देवी हमेशा सतर्क और युद्ध के लिए तैयार रहती हैं। वैसे ही आप हमेशा सतर्क रहती हैं कि कहीं मन-वचन-काया से किसी को कष्ट न हो या कर्मों का बंधन न हो।
आपने एक बार गोष्ठी में फरमाया था कि मैं सोचती हूँ यह व्यवस्था कहीं मेरे कर्मों का बंधन न बन जाए। स्वास्थ्य की प्रतिकूलता में भी आप सहिष्णुता रखकर कर्मों से युद्ध के लिए तैयार रहती हैं। इतने बड़े पद पर होकर भी आप सेवा में पीछे नहीं रहतीं। 2024 सूरत चातुर्मास में जब किसी साध्वी के अस्वस्थ होने का पता चलता, तो आप अपने प्रतिकूल स्वास्थ्य के बावजूद सुबह-शाम उनकी सुध लेने पहुँच जाती थीं।
3. कूष्माण्डा
इस देवी का वास सूर्यमण्डल के केंद्र में है। आप तेरापंथ धर्म संघ की प्रथम बैच की समणी, प्रथम समणी नियोजिका, प्रथम मुख्य नियोजिका और आचार्य श्री महाश्रमण जी के शब्दों में एम.ए. करने वाली प्रथम प्रमुखा हैं। आप विदेश यात्रा करने वाली और अपने आराध्य के दीक्षा दिवस पर 'प्रमुखा' का उपहार पाने वाली प्रथम साध्वी हैं, जिससे आप इतिहास के केंद्र में हैं। आपने वात्सल्य और विनम्रता से साध्वी समाज के दिलों में स्थान बनाया है।
4. स्कंदमात
यह ज्ञान और विवेक की देवी हैं। आप अपने उद्बोधन के द्वारा हज़ारों लोगों को ज्ञान बाँटती हैं। आपके उद्बोधन में जान होती है। जब आप गुरु विषय पर बोलती हैं, तो लगता है साक्षात् गुरु की उजली तस्वीर के दर्शन करा रही हैं। एक लड़की ने यूट्यूब पर आपका प्रवचन सुनकर कहा कि 'अब मुझे पता चला कि वास्तव में गुरु क्या होते हैं, गुरु पर मेरी श्रद्धा और मजबूत हुई है'।
5. कात्यायनी
महिषासुर का वध करने के लिए देवी ने यह रूप लिया था। आपने पूर्व संचित कर्मों का वध करने के लिए दीक्षा ली और एक उत्कृष्ट कोटि की साधिका बनीं। आपके जीवन में अनवरत स्वाध्याय, ध्यान, जप-तप और मौन का क्रम चलता रहता है। कैसा भी संघर्ष हो, आप कात्यायनी बनकर कर्म रूपी महिषासुर का वध करती हैं।
6. कालरात्रि
यह देवी हमेशा शुभ फल देती हैं। आपकी सन्निधि में आने वाला हर व्यक्ति परम शांति प्राप्त करता है। आप आने वालों को सामायिक, माला और स्वाध्याय की प्रेरणा देकर उन्हें शुभ योग से जोड़ती हैं। एक बार साध्वी नमन प्रभा जी के पेट में 4-5 साल से दर्द था, जो आपके बताए जप से ठीक हो गया। अहमदाबाद के एक परिवार की बच्ची की बीमारी भी आपके बताए मंत्र जप से ठीक हुई।
7. महागौरी
यह देवी भक्तों के कष्ट और पाप हर लेती हैं। आपके पास आने वाले श्रावक-श्राविका या साधु-साध्वियां अपनी समस्या रखते हैं और आप ध्यान से सुनकर समाधान देती हैं। आपके पास एक 'मंत्र' है जिससे सारी निराशा आशा में बदल जाती है।
8. शैलपुत्री
यह स्वयं को संतुलित करने की प्रेरणा देती हैं। भीलवाड़ा चातुर्मास के दौरान जब मैं बीमार थी, तो आप (जो उस समय मुख्य नियोजिका थीं) मेरे पास पधारीं और कहा— 'नवीनप्रभा जी, कपड़ा लाओ, मैं धुलाकर शाम तक भेज दूँगी'। इतना बड़ा पद और इतना छोटा काम करने की तत्परता हमें संतुलित रहने की प्रेरणा देती है।
9. सिद्धिदात्री
जब आप आराध्य की भक्ति में लीन होती हैं, तो साक्षात् सिद्धिदात्री का रूप दिखता है। आप नई उम्मीद और उत्साह देकर माँ का रूप धारण करती हैं। महाराष्ट्र यात्रा के दौरान एक मिल मालिक ने बताया कि आपके वहाँ रुकने से उन्हें 12-13 लाख का भौतिक लाभ (सिद्धि) हुआ। आध्यात्मिक स्तर पर, साध्वी गौरवयशा जी के पैर का भयंकर दर्द आपके मंगलपाठ सुनाने मात्र से विहार के दौरान गायब हो गया।
उपसंहार : इतिहास कहता है कि 'जन्म लेना भाग्य के अधीन है, पर व्यक्तित्व पुरुषार्थ की देन है'। आपका यह मुकाम आपके पुरुषार्थ, समर्पण और गुरु कृपा की देन है। आपके चयन दिवस पर यही मंगलकामना है कि आप निरामय रहकर लंबे समय तक संघ सेवा करती रहें और नवीन इतिहास का सृजन करती रहें।