रचनाएं
महाश्रमण की पावन सन्निधि में चयनोत्सव की सदी मनाएं
युगों-युगों तक मिले शासना, भावों का दीपक आज जलाएं
प्रबल पुण्य के प्रबल उदय से, नंदनवन हमने पाया ॥
है मोक्ष मार्ग की साधिका, ऐसा क्या है आपमें
जो देखे आपको तो शासन माता दिखती हैं आपमें
इतनी सादगी, इतनी सहिष्णुता कैसे आई आपमें
तेरापंथ का नया इतिहास दिखता है आपमें।
हैं गुण सम्पन्न आत्मा, ऐसा क्या है आपमें
गुलाब सती की छवि दिखती है आपमें
इतना विवेक, इतना विनय कैसे आया आपमें
इतना व्यवहार, इतना समर्पण कैसे आया आपमें
है वत्सलता का झरना, संघ का गौरव दिखता है आपमें ॥
हैं मुख मुस्कान वाली विश्रुतविभा जी, ऐसा क्या है आपमें
कनककुमारी जी जैसी गंभीरता है आपमें
इतनी मधुर अमृतवाणी कैसे आई आपमें
इतनी श्रद्धा भक्ति कैसे आई आपमें
गुरु महाश्रमण की दृष्टि में ही सृष्टि मन भाई आपमें
गुरु महाश्रमण के संकल्प की अनुप्रेक्षा दिखती है आपमें ॥
हैं पंचमगति का जीव, ऐसा क्या है आपमें
पन्ना जी जैसी अनासक्ति दिखती है आपमें
इतनी वीरता, धीरता कैसे आई आपमें
इतना संकल्प मजबूत हुआ कैसे आपमें
इतनी कार्य कुशलता का 'कार्बोहाइड्रेट' कैसे आया आपमें
हैं चौथे अर का जीव तेरे ये गुण संप्रेषित कर दो मुझमें
सती शिरोमणि का रूप दिखता है आपमें ॥