रचनाएं
जीवन अर्पण हृदय समर्पण, इंगित पर बढ़ जाएँगे
जीवन अर्पण हृदय समर्पण, इंगित पर बढ़ जाएँगे
इंगित पर बढ़ जाएँगे ॥
भैक्षव शासन नन्दनवन में चमका भाग्य तुम्हारा २
नेमानन्दन ने दिखलाया, गण ने भव्य नजारा २
हर्षित पुलकित साध्वीगण सारा, मंगल तिलक लगाएँगे
इंगित पर बढ़ जाएँगे ॥
अध्यात्म धरा पर बढ़ो सदा हम, सभी तुम्हारे साथ हैं २
रुकें न पल भर चरण हमारे, बढ़ें सदा निर्बाध ही
तर जाएँगे भवसागर को, जीवन में अलख जगाएँगे २
इंगित पर बढ़ जाएँगे ॥
अप्रमत्त साधिका बन, अपना जीवन बनाया है २
गुरुओं का आभामंडल पा, निज पौरुष जगाया है २
हम भी प्रेरणा लें हर पल की, दिव्य स्रोत पा जाएँगे २
इंगित पर बढ़ जाएँगे ॥
शुभ भावों का स्वस्तिक रच हम, तुमको आज बढ़ाएँ
स्वस्थ रहो आत्मस्थ रहो तुम, मंगल दीप जलाएँ
चिन्मयता की सौरभ पाकर, भीतर में रम जाएँगे २
इंगित पर बढ़ जाएँगे ॥
(लय – राधा बिना है...)