रचनाएं
महाकीर्तिधर महाश्रमण करते चरणों में वंदन
महाकीर्तिधर महाश्रमण करते चरणों में वंदन,
महासूर्य की किरणों से आलोकित है गण उपवन।
दे दो आशीर्वाद पावन बन जाएं रे...॥
शिशु वय में संयम धारा मां नेमा का उजियारा,
जन्मभूमि सरदारशहर मोहन मुदित बना प्यारा।
विनय, समर्पण पहचान बनाएं रे...॥
जिनशासन की शान हो जन-जन के भगवान हो,
भिक्षुगण के मुकुटमणि संस्कृति के सम्मान हो।
करुणा के सागर अमृत बरसाएं रे...॥
पटोत्सव दिन आया है खुशियां भर-भर लाया है,
शुभ-भावों का अर्घ्य चढ़ाकर मंगल थाल सजाया है।
त्रिभुवन सितारे यश घुंघरू बजाएं रे...॥
युगों-युगों तक शासना मिलती रहे यह भावना,
पंचाचार की साधना बढ़ती रहे यह कामना।
विजय पताका चिहुं दिशी लहराएं रे...॥
तर्ज: जीवन है पानी की बूंद...