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महातपस्वी महाश्रमण के तप का तेज निराला है
महातपस्वी महाश्रमण के तप का तेज निराला है,
चरण टिके जहाँ-जहाँ गुरुवर के फैला नया उजाला है।
कर बद्ध खड़े भक्त द्वार पर अब जादुई मुस्कान बिखेरो
रंग-बिरंगी इस दुनिया में प्रभु तू ही तो रखवाला है॥
महामहिम प्रभु का मिताहार और मितभाषिता है अचरजकारी
नयनों से बहता करुणा निर्झर बुझाता है प्यास युगोंकारी
योग क्षेम वर्ष आयोजन प्रयोग-प्रशिक्षण है मनघारी
उपशम की हम करें साधना चित्त समाधि मंगलकारी॥
महातपस्वी महाश्रमण का नेतृत्व पा हम सब निहाल हो गए
विरल व्यक्तित्व का अद्भुत आलोक पा हम सभी गुलजार हो गए।
सुधर्मा सभा में प्रभु वाणी का अमृत पान कर गुरुवर!
लगता है हम सभी मालामाल हो गए॥
महायशस्वी, महावरदायी अब करुणामय वरदान दिलाएं
सही सोच और सही नज़रिया तम को घाटो पार कराएं
मंगल पल में मंगल कल का आज आधार अभी पाऊँ मैं
प्रभु चरणों में मंगल सन्निधि में द्वार सिद्धि के खुल जाए॥