रचनाएं
जन्मोत्सव प्रभु का आज, हम खुशी मनाते हैं
जन्मोत्सव प्रभु का आज, हम खुशी मनाते हैं।
सेवा, समर्पण का संकल्प बढ़ाते हैं।।
नेमा माँ के नंदन, झुमर कुल उजियारे,
दुगड़ कुल है रोशन, जागे भाग्य हमारे।
अज्ञान अंधेरे को तुम दूर भगाते हो।।
कमनीय कीर्तिधर हो, तुम दिव्य दिवाकर हो,
रमणीय सुधाकर हो, करुणा के सागर हो।
पंचामृत की वर्षा रहते वर्षातें हैं।।
शासन नायक तेरी क्या गुण गौरव गाऊँ,
संयम में रमण करूँ, आराधक पद पाऊँ।
प्रभो! वत्सलता हम पर, हर पल दर्शाते हो।।
हे शांतिदूत प्रभुवर, हे महातपस्वी विभुवर,
हे महाश्रमण श्रुतधर, हे महाप्रज्ञ पट्टधर।
प्रभो! बनो चिरायु तुम, शुभ कामना करते हैं।।
तुलसी की कृति हो तुम, महाप्रज्ञ की उपकृति हो,
तुलसी महाप्रज्ञ द्वय की, तुम बढ़ा रहे ख्याति हो।
ईमान सत्य का पाठ, जन-जन को पढ़ाते हैं।।
(तर्ज: ए मेरे दिले नादान)