रचनाएं
आज दिशाएं गुनगुनाएं, पुरवैया मतवाली
आज दिशाएं गुनगुनाएं, पुरवैया मतवाली।
नन्दनवन गणमंदिर में, जगमगाती दिवाली।
अक्षत कुमकुम सजाएं, श्रद्धा तिलक लगाएं।
अम्बर अमृत बरसाएं शतशः शीश झुकाएं।
आर्य देव के जन्मोत्सव पर अनहद खुशहाली ॥
लाया उजला प्रभात, दूगड़ कुल का जलजात।
भैक्षव गण गणनाथ, झूमर नेमां अंगजात।
गुरुद्वय ने दे दी अभिनव जग सौगात।
सूरज चाँद सितारों पे हम लिख देंगे ख्यात।
कल्पतरु की शीतल छाया, पाए गौरवशाली ॥
अनुपम ज्ञानाचार, बहती श्रुतता की धार।
खिलती जीवन की बयार, संयम निर्मल निरतिचार।
बैठे उपशम की डाल, रचते समता संसार।
दिव्य देव निहारें, अहिंसा यात्रा सुखकार।
पंच निष्ठाओं से अनुबन्धित, जीवन की हर डाली ॥
अनुकम्पा का ज्वार, दिल में उमड़े अपार।
सब की सुनते पुकार जो भी आता है द्वार।
प्रभु दीनों के नाथ, हर्षित पुलकित नरनार।
जन जन घाले झुथकार, जीओ वर्ष हजार।
तीर्थंकर से गणमाली, हम कितने किस्मतशाली ॥
तर्ज – आओ सुनाओ प्यार की...