जय ज्योति चरण जय महाश्रमण चरणों में वंदन करते हैं

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मुनि हिमकुमार

जय ज्योति चरण जय महाश्रमण चरणों में वंदन करते हैं

जय ज्योति चरण जय महाश्रमण चरणों में वंदन करते है।
कल्याण कारी तुम हो प्रभुवर, सब की पीडा को हरते है।।
महाव्रतधारी, धैर्यवान गुरु, जिनशासन की शान हो,
प्रवचन शैली बड़ी निराली, सब गुणों की खान हो.
तेरे आभामण्डल में आ, मंगलमय बन जाते हैं।
जय ज्योति.........
देव तुम्हारा रूप निराला नेमानंदन प्यारे हो ।
महामहिम ज्योतिर्धर भगवन् सब के तारणहारे हो।
अनुशासन वत्सलता से विभु, जीवन बगीया विकसाते हैं
जय ज्योति...........
आचार संपदा, श्रुत संपदा, अप्रतिबद्ध विहारी हो।
स्थितप्रज्ञता तेरी अनुपम, सहज समताधारी हो।
पुण्य पुरुष के राजतिलक पर, अभिनन्दन हम करते हैं।
जय ज्योति.......….
तर्ज - चन्दन सा बदन