संचित पुण्य और पाप साथ चलते हैं, उनसे अपने आप सुख-दुख मिलता है। - आचार्य श्री भिक्षु
संचित पुण्य और पाप साथ चलते हैं, उनसे अपने आप सुख-दुख मिलता है।