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भगवान महावीर का 2595वां दीक्षा कल्याणक महोत्सव
भगवान महावीर की साधना उत्कृष्ट एवं अलौकिक थी। आज दीक्षा कल्याणक महोत्सव उनकी अनासक्त चेतना थी। वे अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अनेकांत के उपासक थे। वर्तमान युग में भी उनकी ज्ञान परक शिक्षाएं प्रासंगिक है। साधना का संकल्प सूत्र है-समता। व्यक्ति सहिष्णु बने। हर स्थिति में समता रखें तब मोक्ष मार्ग की ओर प्रस्थान कर सकेंगे - यह उद्गार 'शासन गौरव' साध्वी राजीमती जी ने भगवान महावीर के 2595 वे कल्याणक महोत्सव पर कहे। प्रारंभ में तेरापंथ महिला मंडल द्वारा 'भगवान महावीर' स्तुति का संगान किया। महिला मंडल अध्यक्षा प्रीति मरोठी एवं पूर्व अध्यक्षा सुमन मरोठी ने महावीर की कष्टों भरी कहानी के संस्मरण सुनाए। साध्वी प्रभातप्रभा एवं साध्वी मनोज्ञप्रभा ने महावीर को संगम एवं चण्डकौशिक के उपसर्ग एवं समतामय पवित्र आभामंडल के बारे में बताया। युवक परिषद द्वारा महावीर के प्रति श्रद्धा सुमन गीतिका के द्वारा अर्पित किए गए। सभा अध्यक्ष शुभकरण चौरड़िया, मंत्री मनोज घीया, तेयुप मंत्री सुरेश बोथरा, डा. प्रेमसुख मरोठी, 'कवि' इंदरचंद बैद, हंसराज भूरा आदि उपस्थित रहे। आज के दिन बीदासर में 43 दीक्षा में साध्वी प्रभातप्रभा की दीक्षा आचार्य महाश्रमण ने प्रदान की। उनके प्रति साध्वी राजीमती ने ज्ञान, दर्शन, चरित्र, संयम में विकास करने का आशीर्वाद प्रदान किया मंगल कामना की। कुशल संचालन युवक सुशील भूरा ने किया। ज्ञात है मुनि अमृत कुमार जी एवं मुनि उपशम कुमार जी देशनोक चातुर्मास सम्पन्न करके नोखा पधारेंगे।