रचनाएं
जैन शासन रो बहुमान बढ़ायो!
चंदेरी रो लाल, वंदना नन्दन! झूमर कुल चमकायो,
भैक्षव गण रो सरताज, जैन शासन रो बहुमान बढ़ायो।
असांप्रदायिक धर्म अणुव्रत रो परचम फहरायो,
संस्कार निर्माण में प्रेक्षाध्यान जीवन विज्ञान रो पाठ पढ़ायो।
भैक्षव गण रो सरताज, जैन शासन रो बहुमान बढ़ायो...
संसद रे गलियारे में नैतिकता रो संदेश सुनायो,
दिल्ली रे दरबार में अनुशासन रो गजब वर्ष मनायो।
अशांत विश्व में शांति रो अनुपम पैगाम पहुंचायो,
दुनिया री मीडिया में गौर वर्ण नाटे कद रो नायक छायो।।
भैक्षव गण रो सरताज, जैन शासन रो बहुमान बढ़ायो...
हे कुंभकार! गांव रे नथु ने भगवान बणायो,
विनयवान मुनि मुदित ने जगत में पुजायो,
शासन माता, साध्वी प्रमुखा ने शिखरा चढ़ायो,
संघीय संपदाओं री श्रीवृद्धि में अनोखो इतिहास रचायो।।
भैक्षव गण रो सरताज, जैन शासन रो बहुमान बढ़ायो...
हे युगदृष्टा! नारी रो उत्थान कर, जग रो कल्याण करयो,
शिक्षा और प्रगति पथ पर रुढ़िवाद समाज रो उदार करयो,
समण श्रेणी, उपासक और जैन संस्कारक रो उद्भव करयो,
घोर विरोधी भी श्रृद्धालु बन, श्रीचरणों में जीवन सफल बनायो।।
भैक्षव गण रो सरताज, जैन शासन रो बहुमान बढ़ायो..
हे धर्म चक्रवर्ती सम्राट! सेवा सुश्रुषा रो राजमार्ग बनायो,
कालुगणी रो नवम पटधर 'मानवता रो मसीहा' कहलायो,
शक्तिपीठ, गंगाणे रो 'शक्तिपुंज' भक्ता री नैया पार लगायों,
ज्योतिपुंज! महाश्रमण तुलसी संयम सदी रो बिगुल बजायो।
भैक्षव गण रो सरताज, जैन शासन रो बहुमान बढ़ायो...