गुणानुवाद सभा का भव्य आयोजन

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गंगाशहर।

गुणानुवाद सभा का भव्य आयोजन

युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि कमल कुमार जी, शासनश्री साध्वी शशिरेखा जी, सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी विशदप्रज्ञा जी, साध्वी लब्धियशा जी, साध्वी जिनबाला जी के सान्निध्य में वयोवृद्धा शासनश्री साध्वी ज्ञानवती जी की गुणानुवाद सभा शान्ति निकेतन सेवा केन्द्र गंगाशहर में आयोजित की गई। शासनश्री साध्वी ज्ञानवती जी का 89 वर्ष की अवस्था में देवलोकगमन हो गया था।  आपने आचार्य श्री तुलसी से 03 फरवरी 1958 को संयम जीवन ग्रहण किया था। आपने 68 वर्ष साध्वी जीवन - संयम जीवन जीया। 
उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि कमल कुमार जी स्वामी ने कहा कि शासनश्री साध्वी ज्ञानवती जी आगमज्ञ तत्वज्ञ के साथ समयज्ञ थी। उन्होंने दीर्घकालीन संयम जीवन को समता सहिष्णुता स्वाध्याय ध्यान से सफल बनाया। उनके भावों के निर्मलता और व्यवहार में निश्चछलता के कारण सबके साथ अपनत्व भाव देखने को मिला। गंगाशहर में उनके संयम काल का अधिक समय लोगों को मिला सब उनकी सरलता से प्रसन्न थे।  उन्होंने तीन आचार्यो का, तीन साध्वी प्रमुखाओं का शासन काल देखा सबसे उनको आदर भाव प्राप्त हुआ।आज स्मृति सभा में यह कामना करता हूँ कि वे उत्तरोत्तर विकास करती हुई चरम लक्ष्य को प्राप्त करें।। मुनि श्रेयांस कुमार जी ने दोहों के माध्यम से अपनी भावनाऐं व्यक्त की। सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी विशदप्रज्ञा जी ने ज्ञानवती जी के गुणानुवाद सभा में अपने भाव रखते हुए कहा कि उनके भीतर प्राणी मात्र के प्रति आत्मियता, वात्सल्य, करूणा का भाव था। उनकी आत्मा के ऊधर्वारोहण की कामना की। 
साध्वी लब्धियशा जी ने साध्वी ज्ञानवती जी के बारे में बोलते हुए कहा कि जिंदगी एक राह गुजर है, राही आते हैं चले जाते हैं कोई वीरले राही होते हैं ,जो यादों में बस जाते हैं। सेवा केंद्र शांतिनिकेतन में सेवाग्रही साध्वी के रूप में आपका सर्वप्रथम स्थान था। साध्वी जिनबाला जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि चाहे वस्तु हो या व्यक्ति जब तक उपयोगी है तब तक उनका मुल्य है, मान - सम्मान है। जो व्यक्ति अंतिम समय तक अपनी उपयोगिता बनाये रखते है, वह आदरणीय होते है। शासन श्री ज्ञानवती जी ने अपनी उपयोगिता अन्त समय तक कम नही होने दी, अपनी उपयोगिता बनाये रखी। 
साध्वी श्री विधिप्रभा जी अपने विचार रखते हुए कहा कि तेरापंथ समाज में ज्ञानवती जी को माता जी के नाम से पहचान थी। उनसे माँ के समान प्यार, स्नेह मिलता था। साध्वी शीतलरेखा जी ने साध्वी ज्ञानवती जी को आचारनिष्ठ, संघनिष्ठ, गुरूनिष्ठ साध्वी बताया। साध्वी कंचनबाला जी ने उनके साथ बिताये गये समय को बहुत ज्ञानवर्धक बताया। साध्वी श्री कौशलप्रभा जी ने कहा कि हमें खुशी है कि यहाँ की चाकरी में अनुभव व ज्ञान का खजाना मिलता है। सबको अपना  बनाने में प्रमोद भावना का गुण सबसे महत्वपूर्ण है। शासन श्री साध्वी ज्ञानवती जी में प्रमोद भावना, वात्सल्य, अपनेपन का विशिष्ट गुण था। गुणानुवाद सभा में संसारपक्षीय परिवार से श्वेता महनोत ने अपने विचार व्यक्त किये। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा से  पवन छाजेड़, महिला मंडल से संजू लालाणी, तेयुप से रोहित बैद, शान्तिप्रतिष्ठान से किशन बैद, अणुव्रत समिति से मनीष बाफना एवं राखी चोरडिया आदि कार्यकर्ताओं ने अपने भावो से श्रद्धा सुमन अर्पित किये।