संस्थाएं
भगवान पार्श्वनाथ जन्म जयंती पर तप अभिनंदन समारोह
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में आज भगवान पार्श्वनाथ जन्म जयंती के पावन अवसर पर उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी के सान्निध्य में तप अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। मुनि श्री ने बताया कि भगवान पार्श्वनाथ ने चातुर्याम धर्म का प्रतिपादन किया, जिसका मूल आधार अहिंसा परमो धर्म है। उनके संदेश का मूल आधार सभी जीवों के प्रति दया, प्रेम और करुणा का भाव रखना है, तथा मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न पहुँचाना है। भगवान पार्श्वनाथ का संदेश हमें शांति, संतोष और समन्वय की ओर ले जाता है। उनके सिद्धांतों का अनुपालन आज भी समाज में व्याप्त संघर्ष और हिंसा को समाप्त करने में सक्षम है। मुनि श्री ने कहा कि आज का युग भौतिकवाद और तनाव से भरा है, ऐसे में भगवान पार्श्वनाथ का संदेश हमें शान्ति, संतोष और समन्वय की ओर ले जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान ने गृहस्थावास में सर्प-सर्पिणी का उद्धार किया और साधु बनने के बाद जन-जन का उद्धार किया।
तपस्या- शुद्धि और दुखों का क्षयतप अभिनंदन समारोह में मुनि श्री ने तपस्या के महत्व को समझाया।तप का महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने भगवान महावीर स्वामी का उदाहरण देते हुए कहा कि "तवो विसुद्धि मगो, तवो दुक्खक्खओ" अर्थात तपस्या आत्मा की शुद्धि का मार्ग है और दुखों का क्षय करने वाली है। तपस्वियों का अभिनंदन मंत्री जतनलाल संचेती ने बताया कि इस अवसर पर अठाई (आठ दिन) की तपस्या करने वाले 57 तपस्वी जनों का अभिनंदन किया गया। इन सभी तपस्वी जनों को साहित्य भेंट करके उनके तप की अनुमोदना की गई, सादगी और 21 व्यंजन सीमा का संकल्प तेरापंथी सभा गंगाशहर के अध्यक्ष नवरतन बोथरा ने कहा कि तेरापंथ समाज में जो कोई भी अपने पारिवारिक आयोजनों—जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मायरा, 25वीं/50वीं वैवाहिक वर्षगांठ आदि अवसरों पर आयोजित स्नेह भोज में 21 व्यंजनों सीमा का पालन करेगा अर्थात 21 व्यंजनों से अधिक नहीं करेगा। कार्यक्रम का संचालन सभा के मंत्री जतन लाल संचेती ने किया। इस अवसर पर महासभा संरक्षक जैन लूणकरण छाजेड़, पूर्व अध्यक्ष अमर चंद सोनी, महिला मंडल, तेयुप, टी पी फ की उपस्थिति रही।