रचनाएं
तेरा अनशन है चन्दन
पायी चादर उजली-उजली, जतन बड़ा पुरजोर।
सतीवर है वन्दन, तेरा अनशन है चन्दन।
तेरा अनशन है चन्दन, विनयश्रीजी को वन्दन।।
भैक्षव शासन पाया, पायी गुरु छाया ।
तुलसी का साया मंगल, तेरे मन को भाया।
पाया रतन अमोला संयम, जीवन में उपहार।।
लम्बी है संयम यात्रा, तुमको हम बधाएं।
साँसों की सरगम तेरी, ॐ भिक्षु गाएं।
आत्मा भिन्न शरीर भिन्न है, अनुभव का इजहार।।
गुरु भक्ति शक्ति का नजारा निराला।
रोम-रोम श्रद्धा से तेरा मतवाला।
चढ़े भावना शिखरों-शिखरों चमक रहा दीदार।
जय हो! जय हो! ज्योति चरण की, जय महाश्रमण दरबार।।
तर्ज़ : स्वर्ग से सुन्दर