जीवन धन्य बणायो

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शासनश्री साध्वी बसन्तप्रभा आदि साध्वी वृन्द

जीवन धन्य बणायो

जीवन धन्य बणायो।
शासनश्री विनयश्रीजी, तप इतिहास रचायो।।
नन्दनवन शासन पायो, तुलसी कर स्यूं दीक्षा।
पुगलिया कुल पर कलश चढ़ायो, पूर्ण करी परीक्षा,
जयपुर नगरी में संघ रो सुयश बढ़ायो।। 1।।
साध्वी सोहनां जी सुवटां जी री सेवा खूब साझी।
साथ वाली सतिया रहती, हरदम थांस्यू राजी,
धन्य-धन्य शासनश्री जी थे, जीवन मोल बढ़ायो ।। 2।।
नहीं मौत रो भय सतायो, नहीं जीणै री आशा,
वीतरागता की मंजिल पर, बढ़णे री अभिलाषा।
गुरू महाश्रमण कृपा स्यूं, संथारो थे थारयो।। 3।।
साध्वी जगवतत्सला जी, अतुलप्रभा जी सेवा करी सांतरी,
संयम में सहयोग देकर, माइतां री ठारी थे आंतरी।
अंतिम समय तक साझ देकर, अपनो फर्ज निभायो।। 4।।
मंत्री मुनि समाधि स्थल पर, अंतिम मनोरथ धारयो,
चढ़ता परिणामां स्यू लीन्हो, भार पार उतारयो।
देवां सौ-सौ बार बधाई, जीवन ने थे चमकायो।
अविनय आशातना हुई महास्यूं तो, माफ थे करिज्यो ।। 5।।
तर्ज़ : संयममय जीवन हो