नव वर्ष के उपलक्ष में पूज्यप्रवर द्वारा कंठस्थ करने हेतु प्रेरित पंच परमेष्ठी से सम्बद्ध गीत

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रचियता : आचार्य श्री तुलसी

नव वर्ष के उपलक्ष में पूज्यप्रवर द्वारा कंठस्थ करने हेतु प्रेरित पंच परमेष्ठी से सम्बद्ध गीत

लय : आसावरी
प्रभू! म्हारै मन-मदिर में पधारो,
म्हारो स्वागत नाथ! सिकारो,
करूं पूजन प्राण-पिया रो,
प्रभू! म्हारै मन-मदिर में पधारो ।।
चिन्मय नै पाषाण बनाऊं, जो परिचय जड़ता रो।
स्वयं अमल अविकार प्रभू तो, स्नान कराऊं क्यारी?
फल फूलां री भेंट करूं के? जीवन अर्पण म्हारो।
अगर तगर, चन्दन के चरचू? कण-कण सुरभित थांरो।
नहीं ताल कंसाल बजाऊं, धूप न दीप उजारो।
केवल लयमय स्तवना गाऊं, ध्याऊं ध्यान गुणां रो।।
मन चंचल है और मलिन है, ओ है धीठ धुतारी।
सब कुछ है तब ही तो तेहूं, सकरुण दृष्टी निहारो।।
वीतराग हो, समदर्शी हो, समता-रस संचारो।
'तुलसी' तारण-तरण तीर्थपति, आपणो विरुद विचारो।।