रचनाएं
नव वर्ष के उपलक्ष में पूज्यप्रवर द्वारा कंठस्थ करने हेतु प्रेरित पंच परमेष्ठी से सम्बद्ध गीत
लय : मैं ढूंढ फिरी जग सारा
पांचू परमेष्ठी प्यारा,
जीवन धन सब कुछ म्हारा, पांचू परमेष्ठी प्यारा।
है असहायां रा सहारा, पांचू परमेष्ठी प्यारा।।
सर्वोच्च अर्हता धारी, अरहंत अमल अविकारी।
तीर्थंकर त्रिभुवन तारी, प्रवही प्रवचन री धारा।।
है सिद्ध सिद्धपद-वासी, अज अजरामर अविनाशी।
परमात्मा परम प्रकाशी, काटी करमा री कारा ।।
धरमाचारज धृतिधारी, निष्कारण पर-उपकारी।
लाखां री नैय्या तारी, भगवान कहूं भगतां रा।।
है उपाध्याय अविकारी, गणिपिटका रा भंडारी।
श्रुतदाता संकट-हारी, जिनशासन-गगन-सितारा।।
मुनिवर जग-ममता त्यागी, समता री प्रतिमा सागी।
है पाप-भीरु वैरागी, 'तुलसी' मनमोहनगारा।।