नव वर्ष के उपलक्ष में पूज्यप्रवर द्वारा कंठस्थ करने हेतु प्रेरित पंच परमेष्ठी से सम्बद्ध गीत

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रचियता : आचार्य श्री तुलसी

नव वर्ष के उपलक्ष में पूज्यप्रवर द्वारा कंठस्थ करने हेतु प्रेरित पंच परमेष्ठी से सम्बद्ध गीत

लय : आए आए जी बदरवा
देवो देवोजी डगर वर, सिद्धि नगर चढ़ ज्यांवूं।
थारो पलक-पलक, मैं अपलक ध्यान लगांवूं।।
किण मारग स्यूं श्रीजिनवरजी! अपणै धाम सिधावो?
समदर्शी सर्वज्ञ परम-प्रभु, परमातम पद पावो।
दरसावो, मैं भी तिण पथ निजर टिकाऊं।।
अक्षय अरुज अनंत अचल अज अव्याबाध कहावो,
क्यूं कर सहजानंद-समन्दर में विलीन हो ज्यावो?
बतलावो, मैं भी बो ही क्रम अपणावू।।
निकट अनंत अलोक पड्यो, क्यूं लोकांत थिति ठावो?
पैंतालीस लाख जोजन में, सारा किया समावो?
समझावो, मैं स्वयमेव समझणो चावूं।।
एकर भी क्षण-भर भी साहिब! साक्षात्कार करावो,
तो मन चाह्या फलै मनोरथ, लाग्यो हृदय उम्हावो।
उमगावो, पर नहिं मन घबराहट मचाऊं।।
अनुपमेय अज्ञेय सच्चिदानन्द दया दिखलावो,
साद्यनंत भगवंत हंत ! भगता नै क्यूं तरसावो?
सरसावो, 'तुलसी' सिद्ध स्तवन सुणाऊं।।