रचनाएं
नव वर्ष के उपलक्ष में पूज्यप्रवर द्वारा कंठस्थ करने हेतु प्रेरित पंच परमेष्ठी से सम्बद्ध गीत
लय : असल दुपट्टो फूल गुलाब
दोनू हाथ जोड़कर करूं, साधु रै चरणा में परणाम,
चरणा में परणाम नाम शिर, करता पाप पलावै।
पावै अजरामर शिव-धाम।।
आत्म-साधना करै निरन्तर, बो ही साध कहावै।
भावै विमल भाव अविराम ।।
पांच महाव्रत करण-जोग-जुत, आजीवन सुध पाळै।
भालै शिव-मग आठूं याम।।
निज जीवन-धन गुरु-अनुशासन, निशदिन शिर धर विचरै।
करणी करै सदा निष्काम।।
पर-उपकार परायण पल-पल, भल उपदेश सुणावै।
पावै प्रतिपल परमाराम।।
अप्रतिबन्ध-विहारी भारी, निज पर आतम तारै।
सारै 'तुलसी' वाछित काम।।