मर्यादा नै म्है शीश झुकावां

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साध्वी पुण्ययशा

मर्यादा नै म्है शीश झुकावां

मर्यादा नै म्है शीश झुकावां
महिमा भिक्षु शासन री गावां
जीवन मैं सुरतरू लहरावै, सबमें जोश जागै
म्हानै मर्यादा रो मोच्छब प्यारो-प्यारो लागै
हो म्हानै नंदनवन सो शासन प्यारो लागै।।
लोह लेखणी भीखणजी री मर्यादा पत्र लिखवायो
लक्ष्मण रेखा ज्यूं दृढ़ता रो जीवन जीणों सिखलायो
जयगणी री सूझ अलबेली मोच्छब रो रूप दिखलायो
उजलां विधि विधाना स्यूं गण नै शिखरां पहुंचायो
शासन रा थे भाग्य विधाता, चक्षुदाता सन्मति प्रदाता
निर्माता तेरापंथ रा सतयुग सो ओ नजारों लागैं।।
सौ-सौ तूफान में भी बाणों किंचित नहीं घबरायो
मर्यादा रै फूला स्यूं गण उपवन नै सरसायो
संघ इस्यो दूसरो नहीं धरा पर देखण में आयो
एक गुरू विधान एक सो सेवा अनुशासन मन भायो
संविधान अलबेलो थांरो, लाखां लोगा नै तारणहारो
अमिट इतिहास संघ रो अटल ध्रुवतारो लागै।।
मेरं शरणं गच्छमि अस्थि मज्जा में रम ज्यावै
आणा जुतो ध्म्मो वाणी संयम शतदल विकसावै
आयरियं शरणं गच्छामि अक्विल पथ दिखलावै
समयं गोयम मा पमायए गुण गरिमा महकावै
सांवरियै रा हां आभारी
महाश्रमण है महाउपकारी
देव रमण सो शासन सुरगां, स्यू मनहारो लागै।।
लय - तेरापंथ रो भाग्य विधाता