स्मृति सभा आयोजित

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गंगाशहर\बीकानेर।

स्मृति सभा आयोजित

सेवा केन्द्र शान्तिनिकेतन में विराजित रही साध्वी मनुयशा जी (लाछुड़ा ) की स्मृति सभा उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि कमलकुमार जी एवं सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी विशद्प्रज्ञा जी एवं साध्वी लब्धियशा जी की सान्निध्य में शान्ति निकेतन सेवा केन्द्र में आयोजित हुई। स्मृति सभा में बोलते हुए उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि कमल कुमार जी स्वामी ने कहा कि आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ है। आत्मा को पाप कर्मों से सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है।
आत्म दर्शी बनों अन्तर दृष्टि का जागरण होने से ही भव भव के जीवन मरण के चक्र को कम किया जा सकता है। साध्वी विशद्प्रज्ञाजी ने अपनी श्रद्धा अभिव्यक्त करते हुए कहा कि उनमें सेवा केन्द्र की व्यवस्थाओं का अच्छा ज्ञान था। हर कोई नये सेवा ग्रुप के लिए अच्छी सलाहकार बनी हुई थी। उनमें करूणा का भाव था। अपनत्व ओर प्रमोद भावन से सबको प्रभावित किया। उनकी आत्मा के मोक्षगामी बनने की कामना की। इस अवसर पर साध्वी लब्धियशा जी ने कहा कि साध्वी मनुयशा जी में आत्मियता ओर वात्सल्य भाव बहुत अच्छा था। काफी वर्षों से रूग्णवस्था में थी फिर भी शारीरिक कष्टों को धेर्य ओर समता के साथ सहन किया।
साध्वीश्री ने कहा कि वीर भूमि मेवाड़ से थी। इस संयम जीवन में भी भी विरागंना का वीरोचित भावना का परिचय दिया। अंत समय में कोई भी चिकित्सा सम्बंधित सेवा नही लेकर दृढ़ मनोबल का परिचय दिया। अपनी साध्वीचर्या के प्रति पूर्ण जागरूक रही। साध्वी धुव्ररेखा जी ने कहा कि मृत्यु से नहीं घबराकर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। साध्वी मंदारप्रभा जी ने कहा कि मैंने मृत्यु के क्षण को तीन बार नजदीक से देखने का अवसर मिला। साध्वी मनुयशा जी के भी अंतिम समय में मुझे पास रहने का मौका मिला। इस जीवन की अंनत काल की यात्रा को शुद्ध साधु जीवन से कुछ काल तक में सीमित किया जा सकता है।