श्रद्धा सुमन समर्पित

रचनाएं

साध्वी कनकरेखा, साध्वी गुणप्रेक्षा, साध्वी संवरविभा, साध्वी हेमंतप्रभा

श्रद्धा सुमन समर्पित

कानकवंरजी शासनश्रीजी नव इतिहस बणायो,
चढ़ते भावां अनशन पचख्यो जीवन दीप जलायो।
बोलो शासन री जयकार, बोलो अनशन की जयकार।।
महावीर रो शासन पायो कितां हा सौभागी।
भैक्षवशासन नंदनवन सो पुण्याई है जागी।
महातपस्वी महाश्रमणजी-2 शासन शिखर चढ़ायो।।
तुलसी कर स्युं दीक्षा लेकर जबरी ख्यात बणाई,
शासन गौरव राजीमती जी साझी सेवा सवाई।
कानकुमारी, मानकुमारी, संयम साथ निभायो।।
मौन साधना, पापभीरूता, इन्द्रिय संयम भारी,
पल पल खिण-खिण जागरूकता, उज्जवलतां भावां री।
आत्म भिन्न शरीर भिन्न है-2 जीवन सूत्र सुहायो।।
श्रदा भक्ति को संगम, नोखा है साताकारी,
भक्ति भाव स्यूं दर्शन खातिर आवै है नर नारी।
अनशन रो ओ स्वर्णिम अवसर, यश परचम फैलायो।।
तर्ज : माईन माईन