रचनाएं
धन्य थे अनशन धारयो है
धन्य थे अनशन धारयो है
ई मन रो सार निकालण नै मनड़ै न मारयो है
लंबो जीवन लंबो संयम लंबी सोच विचार
उजवाल्यो जीवन अरु शासन निर्मलता श्री कार।।
सहज सरलता स्वावलंबिता अजब गजब थारी
गणनिष्ठा गुरु निष्ठा निरखी महकी फुलवारी।।
चुरु नै चमकायो सतिवर सुराणा परिवार
नोखा में अब लीला लहरा हो रही जय जयकार।।
कान मान भगिनी रो जोड़ो गण वत्सल साक्षात
शासन गौरव री सन्निधि में नई बणाई ख्यात।।
तीन तीन आचार्यों रो थे पायो सुख सायो
संथारो कर मुक्ति रो थे झंडो फहरायो।।
मानकुमारी करै कामना शिव रमणी वरज्यो
कर्मकटक स्यु झूझ रह्या झट भव सागर तरज्यो।।
लय - तावड़ा धीमो पड़ज्या रे...