गुरुवाणी/ केन्द्र
मोक्ष की प्राप्ति में गुस्सा और अहंकार उत्पन्न करते हैं बाधा :आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, महातपस्वी युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आर्हत वाड़मय के माध्यम से अपनी पावन देशना प्रदान करते हुए फरमाया कि जैन दर्शन में मोक्ष की बात नव तत्त्वों में भी मिलती है और साधना की अंतिम निष्पत्ति मोक्ष के रूप में होती है। मोक्ष की अवस्था में आठ कार्यों में से कोई भी कर्म विद्यमान नहीं रहता है। मोक्ष के रूप में जो जीव हैं वे अशरीरी हैं, अवाक् हैं और अमन है।
आक्रोश की प्रवृत्ति मोक्ष में एक बाधा है। आक्रोश, गुस्सा मोहनीय कर्म के उदय से होता है। दूसरी बाधा है - अंहकार। व्यक्ति को बुद्धि का और ऋद्धि का भी घमंड हो सकता है। ज्ञानावरणीय कर्म के क्षयोपशम में मति संपदा प्राप्त हो सकती है, परन्तु बुद्धि या ज्ञान की निष्पत्ति भी अहंकार हो सकता है। ज्ञान होने पर भी मौन रहना, सबके साथ सहिष्णुता का भाव रखना बड़प्पन होता है। इसी प्रकार दान करने पर भी ख्याति की कामना नहीं रखनी चाहिए। गुप्त दान को महापुण्य कहा गया है। व्यक्ति को अपनी सुन्दरता का भी घमंड नहीं करना चाहिए। तपस्या आदि का भी अहंकार करना ठीक नहीं होता क्योंकि तपस्या तो व्यक्ति अपने आत्मकल्याण के लिए करता है। इसी प्रकार लब्धि, ऐश्वर्य सत्ता आदि हों तो उनका प्रदर्शन और अहंकार नहीं करना चाहिए।
सहसा-बिना सोचे विशेष काम नहीं करना चाहिए, अविवेक परम आपत्तियों का स्थान है। विमर्श पूर्वक कार्य करने वाले का संपत्ति वरण करती है। परिश्रम करना एक सफलता का आयाम है। व्यक्ति बड़ा हो या छोटा सबके लिए परिश्रम करणीय है। आलस्य परम शत्रु और परिश्रम हमारा बन्धु है, इसे साथ रखना चाहिए।
यथा अनुकूलता परिश्रम करने में व्यक्ति को संकोच नहीं करना चाहिए। अतः आगम में जो मोक्ष प्राप्ति की बाधाएं बताई हैं जैसे-गुस्सा, अहंकार, अनुशासनहीनता आदि से हम बचकर रहें ताकि मोक्ष की प्रप्ति में निर्बाधता रहे। मंगल प्रवचन के उपरांत आज भी चारित्रात्माओं के बोलने का क्रम रहा। साध्वी सुप्रभाजी व साध्वी प्रमिलाकुमारीजी का सिंघाड़ा संयुक्त रूप से तथा साध्वीप्रज्ञावतीजी, साध्वी शशिरेखाजी व साध्वी रचनाश्रीजी के सिंघोड़ ने पृथक-पृथक गीतों का संगान कर आचार्य प्रवर की अभ्यर्थना की। मुनिश्री सुमतिकुमारजी व मुनिश्री पृथ्वीराजजी (जसोल) ने भी अपने हृदयोद्गार व्यक्त करते हुए आचार्यश्री की अभ्यर्थना की।