तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का हुआ भव्य आयोजन

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लिलुआ।

तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का हुआ भव्य आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के निर्देशन में तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन लिलुआ श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा संगम हॉल में किया गया। इस अवसर पर अच्छी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। संभागियों की संख्या 86 थी। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा - जिन‌शासन का एक धार्मिक संगठन है- तेरापंथ, तेरापंथ तेजस्वी, यशस्वी, मनस्वी शासन है। उसकी तेजस्विता का मूल आधार है।
आचार्य भिक्षु इस संगठन के आधप्रवर्तक थे। वे अपने युग के विलक्षण विचक्षण, विशिष्ठ, विवेक संपन्न थे। वे युगदृष्टा युगसृष्टा युगपुरुष थे। वे जमाने के थपोड़ों से घबराए नहीं उन्हें सत्य का प्रकाश मिला, तब उन्होंने निर्भीक होकर उस जमाने की स्थितियों पर खुलकर सैद्धान्तिक विश्लेषण किया। वे कांतिकारी आचार्य के रूप में पहचाने गए। उन्होंने धर्म क्रांति की वह तेरापंथ के रूप में विख्यात हुई। वे 18वीं सदी के एक प्रखर जैनाचार्य महानदार्शनिक तत्त्ववेत्ता व जिनवाणी पर गहरी आस्था रखने वाले महापुरुष थे। उन्होंने जर्म की जैसी सटीक और सरल भाषा में जो व्याख्या की वह अन्यत्र दुर्लभ है।
मुनि ने आगे कहा- आचार्य भिक्षु ने साधन और साध्य शुद्धि पर बल दिया। त्याग धर्म भोग अधर्म, व्रत धर्म अव्रत अधर्म है, अर्हत आज्ञा धर्म व अनाज्ञा अधर्म है हृदय परिवर्तन धर्म है ,बल प्रयोग धर्म नहीं है अहिंसा धर्म है हिंसा अधर्म नै जैसी धर्म की कसौटि‌यां बताकर भव्य जीवों पर बड़ा उपकार किया है। मुनि ने आगे कहा दान दया का सबंध लौकिक व आध्यात्मिक दोनों के साथ है। जहां आत्म रक्षा की बात है वहां आध्यात्मिक दया है जहां प्रणरक्षा की बात है वहाँ लौकिक द‌या है। मुनि ने आगे का प्रत्येक श्रावक को तेरापंथ के दर्शन को समझना जरूरी है ।समझे बिना तेरापंथ मेरापंथ हो नहीं सकता। समर्पण विनयशीलता, सहनशीलता हर परिस्थिति में संतुलित रहने से व्यक्ति तेरापंथ को मेरापंथ बना सकता है।
उपासक सुशील बाफना व सभी श्रावक श्राविकाओं के प्रति आध्यात्मिक मंगल कामना। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि कुणाल कुमार जी के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण लिलुआ सभा के अध्यक्ष अनिल जैन ने दिया। कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक उपासक सुशील जी बाफना ने उद्घाटन सत्र में कार्यशाला की भूमिका को स्पष्ट किया। इस अवसर पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष महेन्द्रजी नाहटा मुख्य न्यासी सुरेशजी गोयल व महामंत्री विनोद बैद ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। इस अवसर महासभा के नवगठित कार्यकारिणी मुनि दर्शनार्थ विशेष रूप से उपास्थित हुई।
लिलुआ सभा द्वारा अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यकत्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।