साध्य के स्वरूप के अनुरूप ही हो साधन : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 01 मार्च, 2026

साध्य के स्वरूप के अनुरूप ही हो साधन : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी जी की पावन सन्निधि में योगक्षेम वर्ष के संदर्भ में मुख्य मंगल प्रवचन का शुभारंभ आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। साध्वी वृंद ने प्रज्ञा गीत का संगान किया। तदुपरान्त परम पूज्य आचार्य प्रवर ने निर्धारित विषय ‘साध्य-साधन शुद्धि’ पर अमृत देशना प्रदान करते हुए फरमाया कि साध्य, साधन, शुद्धि ये तीन शब्द है। एक साध्य होता है और साध्य से किसी दृष्टि से जुड़ा हुआ साधन होता है। साध्य और साधन दोनों में समानता का दर्शन किया जा सकता है। जैसा साध्य होता है उसके अनुकल ही यदि साधन होता है तो साध्य की प्राप्ति हो सकती है।
धार्मिक जगत में आत्मवाद का सिद्धान्त है। जो आत्मा के अस्तित्व को मानता है, पूर्वजन्म-पुनर्जन्म के सिद्धान्त को मानता है, पुण्य-पाप के फल को मानता है, वह आस्तिक है। जैन दर्शन आत्मा में विश्वास करता है कि आत्मा है और आत्मा शाश्वत है, पूर्वजन्म-पुनर्जन्म व पुण्य-पाप के फल और कर्मवाद को भी जैन दर्शन स्वीकार करता है। आत्मा जन्म-मरण करती है तो उसके मोक्ष की बात भी होती है।
साधुपन स्वीकार करने का अंतिम लक्ष्य अर्थात् साध्य मोक्ष है। प्रश्न है कि मोक्ष प्राप्ति का साधन क्या है? मोक्ष परम पवित्र तत्त्व है तो उसका साधन भी पवित्रता ही बन सकता है और वह पवित्र साधन है - धर्म। मोक्ष में वीतरागता होती है तो मोक्ष का साधन भी वीतरागता ही बनेगा। मोक्ष में अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन है तो उसका साधन भी सम्यक् ज्ञान और सम्यक् दर्शन ही बनेंगे। मोक्ष राग-द्वेष रहित है, उसमें संयम है तो मोक्ष का साधन भी संयम बनेगा। हमारे साध्य के स्वरूप के अनुरूप ही हमारा साधन होना चाहिए। साधना काल के साधन ज्ञान, दर्शन चारित्र सिद्धि प्राप्त होने के बाद साध्य में विलीन हो जाते हैं।
आचार्य प्रवर ने कहा कि आज फाल्गुन शुक्ला त्रयोदशी है। तिथि के अनुसार आज आचार्यश्री भिक्षु का मासिक जन्म दिवस भी है और मासिक महाप्रयाण दिवस भी है। अभी आचार्य श्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष चल रहा है, जिसे भिक्षु चेतना वर्ष नाम दिया गया है। मंगल प्रवचन के उपरांत आचार्य प्रवर ने चारित्रात्माओं को अपनी जिज्ञासाएं प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर उन्हें समाहित किया। आज से चारित्रात्माओं के लिए प्रारंभ हो रहे प्रेक्षाध्यान शिविर के शुभारंभ के संदर्भ में संभागी चारित्रात्माओं को आचार्यश्री ने प्रेक्षाध्यान की उपसंपदा प्रदान की। मुनि श्रेयांश कुमारजी ने गीत का संगान किया।
अणुव्रत स्थापना दिवस के संदभ्र में अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रताप सिंह दूगड़ व अणुव्रत समिति लाडनूं के अध्यक्ष शांतिलाल बैद ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। पायल बैद ने गीत का संगान किया। मंत्री राज कोचर ने भी अभिव्यक्ति दी। आचार्य प्रवर ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।