प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का हुआ आयोजन

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उत्तरपाड़ा।

प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का हुआ आयोजन

आचार्यश्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमारजी ठाणा 3 के सान्निध्य में तथा प्रेक्षा फाऊन्डेशन के तत्वावधान में तथा तेरापंथ सभा के सहयोग से प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का आयोजन उत्तरपाड़ा स्थित शांतिनगर में हुआ। जिसमें 35 संभागी व ज्ञानशाला के ज्ञानार्थी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर मुनि जिनेशकुमारजी ने कहा- भौतिकता की अंधी दौड़ में व्यक्ती तनाव से ग्रसित है। आज की सबसे बड़ी बीमारी तनाव है। तनाव मानसिक असंतुलन का बड़ा कारण है।
जहां एकांगी दृष्टिकोण होता है वहां विलासिता का भाव बढ़ता है। तनाव मुक्ति का उपाय है-कायोत्सर्ग। कायोत्सर्ग प्रेक्षाध्यान व अध्यात्म की आधार भूमि है। कायोत्सर्ग कर्म निर्जरा का कारण है। अभ्यांतर तप है। राजा चन्द्रावतंसक ने कायोत्सर्ग की साधना से परम तत्व को पाया। कायोत्सर्ग से शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राप्त होता है। मुनिजी ने आगे कहा कायोत्सर्ग के तीन अर्थ–शिथिलीकरण, सहिष्णुता, अभय है।
अभय धर्म का रहस्य, धर्म का आदि बिन्दु है, कष्टों को, दर्द को सहन करना संहिष्णुता हो प्रत्येक अवदव के प्रति जागरुकता रखना कायोत्सर्ग है। कायोत्सर्ग से शरीर में स्फूर्ति आता है। अनिद्रा को दूर करने वाला तत्व है। मुनिजी ने कायोत्सर्ग का प्रयोग कराया व ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों आदि को भी संबोध दिया। प्रेक्षा प्रशिक्षिका मनीषा नाहटा, व श्रीमति डोसी ने विचार रखे व प्रयोग कराएं।