मंगल भावना कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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कोकराझार।

मंगल भावना कार्यक्रम का हुआ आयोजन

तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान् सुशिष्य मुनि आनंद कुमार जी 'कालू' एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार जी ठाणा -2 के पावन सान्निध्य में मंगल भावना कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि आनंद कुमार जी 'कालू' के महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। इस मौके पर मुनि आनंद कुमार जी 'कालू' ने अपने मंगल पाथेय में कहा कि संतों का लगा रहता है आना जाना, उनका नहीं कोई ठिकाना। संत किसी भी एक जगह पर नहीं रह सकते। जिस तरह बहता पानी निर्मला, पड़ा गंदीला होय, साधु तो रमता भला, दाग न लागे कोय'। इस तरह संतों को भी मोह माया त्याग कर हमेशा विहार करते रहना चाहिए। मुनिश्री ने आगे कहा कि व्यक्ति को सरल व गंभीर होना चाहिए। व्यक्ति को केश की तरह मुलायम, मोमबत्ती की तरह प्रकाशित, सुई की तरह जोड़ना, कंधी की तरह सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। ठीक वैसे ही सभी संस्थाओं को मिल-जुल कर काम करके एकरूपता दिखानी चाहिए। साधु-साध्वियां, श्रावक-श्राविका धर्म संघ के अभिन्न अंग हैं। जैसे सलिल की शोभा कंगन से होती है, वैसे ही मणि की शोभा धर्म संघ के साधु साध्वियों से होती है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र व तप की आराधना सभी को करनी है। हमारे जाने के बाद श्रावक समाज अरमणीक मत बनना, रमणीक बनने का प्रयास करना। तेरापंथ सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल एवं ज्ञानशाला परिवार सभी के लिए मुनि आनंद कुमार जी 'कालू एवं अपने सहवर्ती संत मुनि विकास कुमार जी ने आशीर्वाद दिए। इस अवसर पर जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष किशनलाल नाहटा ने बताया कि जैन धर्म के सभी साधु-संत चार महीना चातुर्मास के लिए एक जगह स्थित होकर धर्म आराधना में लीन हो जाते हैं। इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल की बहिनो द्वारा सामूहिक विदाई गीत प्रस्तुत किया गया, कार्यक्रम का सफल संचालन तेरापंथी सभा के मंत्री दिलीप सेठिया ने किया।