शासन माता की अमर कहानी हर अधरों पर जुबानी

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साध्वी श्री गुरूयशा, साध्वी श्री जयंतप्रभा

शासन माता की अमर कहानी हर अधरों पर जुबानी

शासन माता की अमर कहानी, हर अधरों पर जुबानी।
बलिहारी जाता सारा संसार है।
हो माता! चरणों में प्रणति बारंबार है।।
चंदेरी की दिव्यमणी में सागर सी गहराई।
शिखरों छूने वाली तेरी कार्य शक्ति ऊंचाई।
समता तोली भापी नहीं जाती, पाई थी अद्भुत ख्याति।
तेरी महिमा तो अपरंपर है…।।
जो भी आता सन्निधि में वो सम्मोहित हो जाता।
जीवन भर वो भूल न पाता तेरा ही बन जाता।
बहता ममता का स्रोत शुभंकर, दृष्टि सम रहती सब पर।
तेरी क्षमता का आर न पार है…।
सद्संस्कारों से कोमल कलियों को सुरभित करती।
अमृत वचनों से प्राणों में नव स्पंदन तुम भरती।
इतनी जल्दी तुम छोड़ दोगी, हम से मुख मोड़ लोगी।
स्मृतियों में बसता दिव्य दिदार है…।।
शासन माता सम्बोधन से गुरुवर ने विरूदाया।
अमृत मोच्छव गण उपवन में, अभिनव खुशियां लाया।
निष्ठा पंचक से थी अनुरक्ति, गुरू चरणों से गहरी प्रीति।
खोला शिवपुर को तुमने द्वार है…।।
सेवा कर गुरूओं की तुमने अर्जित की पुन्याई।
माझी बन गुरू महाश्रमण ने नैय्या पार लगाई।
प्यासे नयनों की प्यास बुझाओ, दर्शन दे तृप्त बनाओ।
सुन लो अन्तरदिल की पुकार है…।
योगक्षेम वर्ष का अद्भुत होगा भव्य नजारा।
साक्षी नजरों में उभरेगा, वो अतीत उजियारा।
यादें स्मृतियों में रंग भरेगी, सपने साकार करेगी।
गुरू महाश्रमण साया सुखकार है…।।
लय- मेरी आशा के अमर…