स्व. शासनश्री साध्वी सरोज कुमारीजी के प्रति

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मुनि कमलकुमार

स्व. शासनश्री साध्वी सरोज कुमारीजी के प्रति

मुनि गणेश उपदेश से, जाग उठा वैराग
तुलसी मुख दीक्षा ग्रही, जगा परम सौभाग।।
महाप्रज्ञ महाश्रमण से, मिला खूब सत्कार
शासनश्री साध्वी बनी, जन मन हर्ष अपार।।
लाडां-कनक-विश्रुतविभा, महा सतियां जी तीन
कृपा पात्र बनकर रही, आत्म ध्यान में लीन।।
संथारा स्वीकार कर, किया है अनुपम काम
सरोज कुमारी का हुआ अमर संघ में नाम।।
चढ़ते बढ़ते ही रहे प्रतिपल अब परिणाम
यही भावना भा रहे हम सब आठों याम।।
महाश्रमण गुरुदेव का है व्यक्तित्व विराट
सभा सुधर्मा में लगा स्मृति सभा का ठाठ।।
करके क्रमशः साधना प्राप्त करें शिव धाम
जन्म मरण के चक्र से कमल वरें विश्राम।।