होली के रंग आध्यात्मिकता के संग

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जयपुर।

होली के रंग आध्यात्मिकता के संग

भिक्षु साधना केन्द्र श्याम नगर में होली पर्व के संदर्भ में आयोजित विशेष प्रवचन देते हुए कहा संदेह की होली जलाने और श्रद्धा के फूल खिलाने का पर्व है - होली। उन्होंने होली की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि होली एक प्रकार से बीते हुए कल के खिलाफ बगावत है। आज मन मुटावों, बुरे विचारों और व्यवहारों को भुलाने का एक स्वर्णिम अवसर है। होली अशुभ भावों को जलाने का और शुभ भावों के रंग में रंगने-रंगाने का सुंदर मौका है। मुनि श्री जी ने आगे कहा - सत्य को परेशान तो किया जा सकता है, परंतु परास्त नहीं कर सकते। अंत में जीत हमेशा सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। मुनि संभव कुमार जी ने कहा - होली के अवसर पर ऋतु बदलती है। बदलाव जीवन में भी आना चाहिए। तनाव मुक्त और हल्का होने का पर्व है होली। इस अवसर पर तेरापंथ धर्म संघ की आठवीं साध्वीप्रमुखा शासन माता साध्वी श्री कनकप्रभाजी की पांचवीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा से याद कर भावांजलि अर्पित की। मौके पर श्रावक संदीप भंडारी ने गीत से उन्हें श्रद्धांजली अर्पित की।